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दीयाकुमारी ने राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिये लोकसभा में प्रस्तुत किया संविधान संशोधन विधेयक
By Lokjeewan Daily - 06-08-2022

लोकसभा के मानसून सत्र में राजसमन्द सांसद दीयाकुमारी ने राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने हेतु संविधान संशोधन विधेयक 2022 प्रस्तुत किया। सदन में प्राइवेट बिल पेश करते हुए सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि भाषा किसी क्षेत्र के इतिहास संस्कृति जनता शासन प्रणाली पारिस्थितिकी राजनीति आदि की सूचक है। राजस्थानी पश्चिमी इंडो-आर्यन मूल की एक भाषा है जो पूरे राजस्थान के साथ ही हरियाणा गुजरात तथा मध्य प्रदेश के कुछ भागों में व्यापक रूप से बोली जाती है।

राजस्थानी भाषा देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। यह 1500 से भी अधिक वर्षों की समृद्ध विरासत है। राजस्थानी भाषा में 7वीं शताब्दी ईस्वी पूर्व के प्रसिद्ध प्राचीन दार्शनिकों खगोलविदों गणितज्ञों कवियों और लेखकों के कार्यों की भी पहचान की गई है और उन्हें संरक्षित किया गया है।

सांसद दीयाकुमारी ने संविधान संशोधन बिल पेश करने के पुख्ता कारणों और उद्देश्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थानी भाषा की उपस्थिति विभिन्न सांस्कृतिक क्षेत्रों जैसे संगीत कला नृत्य और नाटक में भी देखी जा सकती है। राजस्थानी भाषा ऐतिहासिक और पारंपरिक रूप से बहुत समृद्ध होने के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर घोर उपेक्षा की शिकार है। अंततः इससे भाषा के अपने अस्तित्व को खोने का खतरा उत्पन्न हो जाता है। साथ ही संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जा रही परीक्षाओं की योजना में अब तक राजस्थानी भाषा को शामिल नहीं किया गया है। परिणामस्वरूप इस भाषा में दक्ष विद्यार्थी कुशलता से इसका प्रयोग करने में असमर्थ हैं। राजस्थानी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने से रोजगार के भी अवसर सृजित होंगे।

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