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नई दिल्ली, वक्फ संशोधन विधेयक एनडीए यानी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस की एकजुटता का पहला बड़ा इम्तिहान है। इस विधेयक को पारित करने के लिए सरकार को एनडीए को एकजुट रखना होगा, तभी वह दोनों सदनों से विधेयक को मंजूरी दिला सकेगी। चूंकि, विपक्षी गठबंधन इंडिया समेत कई दल इस विधेयक के विरोध में हैं, इसलिए चुनौती ज्यादा है। हालांकि, विधेयक पेश होने के पहले भाजपा ने अपने दोनों प्रमुख सहयोगी दलों जद(यू) और टीडीपी के सुझावों को विधेयक में शामिल कर बहुमत का आंकड़ा मजबूत किया है।
वक्फ विधेयक बुधवार को लोकसभा में और उसके बाद राज्यसभा में पेश किया जाना है। विपक्षी इंडिया गठबंधन ने विधेयक के विरोध में अपना रुख साफ कर दिया है। इसे देखते हुए दोनों सदनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष में जोरदार बहस के साथ काफी तनातनी भी देखने को मिल सकती है। मंगलवार को सरकार के लिए राहत की बात यह रही कि उसके दोनों प्रमुख सहयोगी टीडीपी और जद(यू) ने विधेयक का समर्थन करने की बात कही है।
इसके पहले सरकार ने इन दोनों प्रमुख सहयोगी दलों के सुझावों को विधेयक में शामिल करने का फैसला किया। इसके बाद दोनों दलों ने समर्थन देने की बात कही। दोनों दलों के जो सुझाव शामिल किए गए हैं, उनमें वक्फ संपत्तियों को लेकर मुस्लिम समुदाय के हितों की रक्षा है।
क्या है नंबर गेम
लोकसभा के अंकगणित के अनुसार, 542 सदस्यों वाली प्रभावी सदन संख्या में एनडीए के पास 293 सदस्य यानी उसके पास अपना स्पष्ट बहुमत है, लेकिन यह बहुमत जद(यू) और टीडीपी के दम पर है, क्योंकि भाजपा के अपने 240 सदस्य ही हैं। दूसरी तरफ विपक्षी इंडिया गठबंधन में 233 सांसद हैं। ऐसे में एनडीए की एकजुटता ही विधेयक को लोकसभा में पारित करने में किसी तरह की समस्या नहीं आने देगी। राज्यसभा में प्रभावी 236 सदस्यों वाले सदन में छह मनोनीत सांसदों का समर्थन मिलने पर एनडीए की कुल संख्या 122 पहुंच जाती है। इस तरह 119 के बहुमत के आंकड़े को देखते हुए यह संख्या विधेयक को पारित करने के लिए पर्याप्त रहेगी।
लोकसभा: निचले सदन में एनडीए को 272 मतों की जरूरत है। 542 सांसदों में 240 भाजपा के पास हैं। जबकि, 12 जदयू, 16 टीडीपी, 5 एलजेपी (आरवी), 2 रालोद और 7 शिवसेना से हैं।
राज्यसभा: राज्यसभा में 98 भाजपा, 4 जदयू, 2 टीडीपी, 3 राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, 1 शिवसेना और 1 रालोद मिलाकर एनडीए के पास 125 सांसद हैं। राज्यसभा में बिल को 119 सांसदों के समर्थन की जरूरत है। इसके अलावा एनडीए को असोम गण परिषद, और तमिल मनीला कांग्रेस के साथ-साथ 6 नामित सदस्यों से भी समर्थन की उम्मीद है।
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