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800 वर्षों से चली आ रही अनूठी परंपरा, फूलडोल में गांव वाले दुल्हा बनकर करते हैं नृत्य
By Lokjeewan Daily - 05-03-2026

राजसमंद लोकजीवन। जिले के बड़ा भाणुजा गांव में भगवान लक्ष्मी नारायण मंदिर प्रांगण में पालीवाल ब्राह्मण समाज के लोग फूलडोल महोत्सव में दुल्हा की वेशभूषा धारण कर नृत्य करते हुए गले मिलते हैं। यह अनुठी परंपरा समाज की पिछले 800 वर्षों से चली आ रही है। धुलेंडी होने वाले फुलडोल  महोत्सव देखने के लिए आसपास के क्षैत्र के साथ दूर-दूर से लोग बड़ा भाणुजा गांव पहुंचते हैं।  गांव के चिराग पुरोहित बताया कि होली जलने के दूसरे दिन धुलेंडी के पर्व पर बड़ा भाणुजा के पालीवाल ब्राह्मण समाज के लोग दोपहर 1 बजे से आराध्य भगवान लक्ष्मी नारायण मंदिर प्रांगण में एकत्रित होने शुरू होते हैं,यह क्रम समय के साथ धीरे-धीरे चलता रहता है। समाज के लोग दूल्हे की पारंपरिक  वेशभूषा—धोती-कुर्ता, माथे पर पाग, साफा और तुरी-कलंगी गले में दुपट्टा के साथ सजधज कर दोपहर तक मंदिर परिसर में पहुंचते हैं। इससे पहले गांव में धुलेंडी का पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है।
समाज के बड़े बुजुर्गों द्वारा भगवान लक्ष्मी नारायण आलौकिक श्रृंगार कर शाही पालकी में बिराजित कर मंदिर के बाहर लाया जाता है। इसके बाद भगवान के समक्ष सैकड़ों पुरुष पारंपरिक मेवाड़ प्रसिद्ध थाली, मादल और ढोल थाप की धुन पर नृत्य करते हुए एक-दूसरे से गले मिलते हैं और भगवान लक्ष्मी नारायण को रिझाते है लोगों में यह विश्वास होता है कि भगवान स्वयं हमारे बीच में आकर फूलडोल का आनंद ले रहे हैं। फुलडोल अवसर पर खूब गुलाल अबीर से ठाकुर जी के साथ लोग रंग में सरोबार हो जाते हैं। इस दिन लोग आपसी मतभेद भुलाकर जीवन में आगे बढऩे का संदेश देते हैं। फूलडोल महोत्सव को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों सहित मेवाड़ के विभिन्न इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। विशेष बात यह रही कि बड़ा भाणुजा के लोग, जो वर्षभर कहीं भी रह रहे हों, इस अवसर पर अपने गांव पहुंचकर परंपरा का निर्वहन करते हैं। महोत्सव के दौरान पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल रहा और मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा।

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