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प्रदेश में चार सालों में लॉ एंड ऑर्डर और महिला सुरक्षा की स्थिति मजबूत
By Lokjeewan Daily - 19-01-2022

 अशोक गहलोत के बतौर गृह मंत्री प्रदेश में लॉ एंड ऑर्डर और महिला सुरक्षा की स्थिति को बेहतर बनाने में कामयाबी मिली है. गहलोत सरकार ने प्रदेश में महिला अपराधों की रोकथाम एवं प्रभावी अनुसंधान के लिए हर जिले मेंअतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद का सृजन, अनिवार्य एफआईआर रजिस्ट्रेशन, जघन्य अपराधों के लिए अलग इकाई का गठन, महिला एवं बाल डेस्क का संचालन, सुरक्षा सखी, पुलिस मित्र, ग्राम रक्षक, महिला शक्ति आत्मरक्षा केंद्र जैसे नवाचार किए हैं.

महिला अपराधों में अगर आंकड़ों की बात करें तो राज्य में पॉक्सो एक्ट एवं महिला अत्याचार के प्रकरणों के निस्तारण में लगने वाला औसत समय काफी कम हो गया है. दुष्कर्म के मामलों में अनुसंधान समय वर्ष 2018 में 211 दिन था जो वर्ष 2021 में घटकर 86 दिन रह गया है. साथ ही जिलों में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में गठित स्पेशल इंवेस्टिगेशन यूनिट के कारण महिला अत्याचार के लंबित केसों की संख्या 12.5 प्रतिशत से घटकर 9.3 प्रतिशत रह गई है।

राजस्थान पुलिस ने वर्ष 2021 में पॉक्सो एक्ट के 510 प्रकरणों में अपराधियों को सजा दिलवाई है, जिनमें से 4 मामलों में मृत्यु-दंड और 35 प्रकरणों में आजीवन कारावास की सजा मिली है. कोटखावदा, पिलानी, कांकरोली, पादूकलां, सवाई माधोपुर जैसे कई मामलों में तो रिकॉर्ड समय में अनुसंधान पूरा करते हुए पीड़ित को न्याय दिलाया गया है.

प्रदेश में अनिवार्य एफआईआर रजिस्ट्रेशन की नीति के बेहतर परिणाम सामने आए हैं. वर्ष 2018 में दुष्कर्म के 30 प्रतिशत से अधिक मामले कोर्ट के इस्तगा के माध्यम से दर्ज होते थे, इनकी संख्या घटकर अब 16 प्रतिशत रह गई है. अनिवार्य एफआईआर की नीति से महिलाओं सहित कमजोर वर्गों का थाने तक पहुंचने का हौसला बढ़ा है. फरियादियों की उचित माहौल में सुनवाई के लिए प्रदेश के 674 थानों में स्वागत कक्ष बन चुके हैं और 147 थानों में कार्य प्रगतिरत है.

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