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आरजीएचएस (RGHS) का बड़ा फैसला : ओपीडी में 2,000 रुपये तक की नियमित जांचों के लिए प्री-ऑथराइजेशन की जरूरत नहीं
By Lokjeewan Daily - 11-07-2026

जयपुर। राजस्थान सरकार की स्वास्थ्य योजना (RGHS) के तहत ओपीडी सेवाओं के दौरान होने वाली नियमित जांचों (Routine Investigations) की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) की परियोजना निदेशक डॉ. निधि पटेल (IAS) द्वारा जारी एक आधिकारिक परिपत्र के अनुसार, ये नए नियम आगामी 13 जुलाई 2026 से प्रभावी रूप से लागू कर दिए जाएंगे। नए नियमों के लागू होने से आरजीएचएस लाभार्थियों को अस्पतालों में ओपीडी जांचों के लिए लंबी प्रक्रियाओं से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। परिपत्र के अनुसार मुख्य दिशा-निर्देश इस प्रकार हैं :
2,000 रुपये तक की जांचों पर छूट : ओपीडी सेवाओं के तहत यदि डॉक्टर द्वारा लिखी गई नियमित जांचों की कुल लागत 2,000 रुपये तक है, तो बिना किसी प्री-ऑथराइजेशन (पूर्व-अनुमति) के सीधे जांच कराई जा सकेगी।
2,000 रुपये से अधिक पर पोर्टल से मंजूरी अनिवार्य : यदि नियमित जांचों का कुल खर्च 2,000 रुपये से अधिक बैठता है, तो संबंधित अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटर को जांच करने से पहले आरजीएचएस पोर्टल (RGHS Portal) के माध्यम से प्री-ऑथराइजेशन लेना अनिवार्य होगा।
आपातकालीन स्थिति में तुरंत इलाज : इमरजेंसी (आपातकाल) के मामलों में प्री-ऑथराइजेशन की कोई बाध्यता नहीं होगी। इलाज कर रहा अस्पताल या डॉक्टर तुरंत आवश्यक जांचें शुरू कर सकता है। हालांकि, इसके बाद उचित क्लिनिकल दस्तावेज और औचित्य आरजीएचएस पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
मंजूरी के लिए अपलोड करने होंगे ये दस्तावेज : 2,000 रुपये से अधिक की जांचों की मंजूरी के लिए डॉक्टरों को मरीज की ओपीडी पर्ची (Prescription), संबंधित मेडिकल हिस्ट्री, पुरानी जांच रिपोर्ट (यदि उपलब्ध हो) और जांच की आवश्यकता का स्पष्ट क्लिनिकल औचित्य पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
समय पर फैसला न होने पर 'ऑटो-अप्रूव्ड' मानी जाएगी रिक्वेस्ट
नियमों के तहत थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA) को ऑनलाइन प्राप्त होने वाले इन अनुरोधों का त्वरित निपटारा करना होगा।
गंभीर या अर्जेंट (Urgent) जांचों के अनुरोध का निपटारा 1 घंटे के भीतर करना होगा।
सामान्य या गैर-उदार (Non-Urgent) मामलों के अनुरोध का निपटारा 3 घंटे के भीतर करना होगा।
यदि टीपीए द्वारा तय समय सीमा के भीतर कोई निर्णय नहीं दिया जाता है, तो उस रिक्वेस्ट को स्वतः ही 'ऑटो-अप्रूव्ड' (Deemed to have been Auto-Approved) मान लिया जाएगा।
सभी निजी और सूचीबद्ध अस्पतालों को पालना के निर्देश
परियोजना निदेशक ने राज्य के सभी निजी एम्पैनल्ड अस्पतालों, एम्पैनल्ड डायग्नोस्टिक सेंटरों, थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA) और संबंधित हितधारकों को इन नियमों की कड़ाई से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। 13 जुलाई 2026 या उसके बाद सबमिट होने वाले ओपीडी रूटीन इन्वेस्टिगेशन के सभी मामलों पर यह नया आदेश लागू रहेगा

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