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Update Google Chromeब्रेकिंग न्यूज़
नई दिल्ली में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की अध्यक्षता में हुई हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की उच्चस्तरीय बैठक ऐसे समय में हुई है, जब नेपाल में हाल में आई भीषण हिमालयी आपदा ने पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चेतावनी पैदा कर दी है। हम आपको बता दें कि नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में अगस्त के अंत में ग्लेशियर और चट्टानी हिस्से के विशाल ढहाव के बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने हजारों लोगों को प्रभावित किया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार मृतकों की संख्या एक हजार से अधिक हो चुकी है और हजारों लोग अब भी लापता हैं।
इस पृष्ठभूमि में भारत द्वारा ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) और हिमस्खलन के खतरों पर की गई यह समीक्षा बदलते हिमालयी पर्यावरण के सामने एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय रणनीतिक पहल है। हम आपको बता दें कि बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिवों तथा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के प्रतिनिधियों के साथ गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, केंद्रीय जल आयोग, भारत मौसम विज्ञान विभाग और रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। केंद्रीय गृह सचिव ने विशेष रूप से संवेदनशील ग्लेशियल झीलों, हिमस्खलन संभावित क्षेत्रों और संभावित जल-प्रवाह मार्गों की निरंतर एवं सक्रिय निगरानी पर जोर दिया।
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