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Update Google Chromeब्रेकिंग न्यूज़
भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में प्राइवेट कंपनियों की बढ़ती भागीदारी को लेकर इसरो के कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के मैन्युफैक्चरिंग और लॉन्च से जुड़े कामों को निजी कंपनियों को दिए जाने की चर्चाओं के बीच संगठन के हजारों कर्मचारियों में अपने भविष्य को लेकर असमंजस पैदा हो गया है।
केंद्र सरकार की ओर से करीब छह साल पहले अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोले जाने के बाद अब इसरो के नौ कर्मचारी संघ एक साथ सामने आए हैं। इन संगठनों ने इसरो अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी. नारायणन को पत्र लिखकर सरकार की नीति और कर्मचारियों के भविष्य को लेकर स्पष्ट जवाब मांगा ।
नौ कर्मचारी संघों ने 4 सितंबर 2026 को वी. नारायणन को संयुक्त पत्र भेजा। इसमें उन्होंने पूछा है कि अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका के बीच इसरो की आगे क्या जिम्मेदारी होगी और मौजूदा कर्मचारियों के भविष्य पर इसका क्या असर पड़ेगा। कर्मचारी संगठनों ने आने वाली भर्तियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर इसरो के मौजूदा काम धीरे-धीरे निजी कंपनियों को दिए गए तो संगठन में नई भर्तियों और कर्मचारियों के प्रमोशन के अवसरों पर भी असर पड़ सकता है।
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