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भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, डर नहीं विश्वास जरूरी : वित्त मंत्री सीतारमण
By Lokjeewan Daily - 25-05-2026

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत बनी हुई है और कुछ लोग भारत में डर फैलाने की कोशिश कर रहे हैं और इससे जनता का विश्वास कम होता है। उन्हें ऐसा करने के बजाय लोगों में विश्वास पैदा करना चाहिए। सिडबी के फाउंडेशन डे कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने भारत की आर्थिक प्रगति के बारे में "निराशावादी और संशयवादी दृष्टिकोण" फैलाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि यह आम नागरिकों की उपलब्धियों और योगदानों को अनुचित रूप से नजरअंदाज करता है।
उन्होंने आगे कहा कि सभी हाई-फ्रीक्वेंसी इंटीकेटर्स दिखाते हैं कि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। सितंबर 2025 में दरों में कटौती के बावजूद जीएसटी संग्रह मजबूत बना हुई है, जबकि खुदरा, कृषि और एमएसएमई क्षेत्रों में वाहन बिक्री और ऋण वृद्धि स्वस्थ बनी हुई है।
सीतारमण ने सीआईआई के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सितंबर 2025 में निजी क्षेत्र के व्यय में सालाना आधार पर 67 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि मार्च तिमाही में कंपनियों का लाभ मार्जिन अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
हालांकि, उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष से ईंधन की ऊंची कीमतों, शिपिंग लागत में वृद्धि और निर्यात में व्यवधान के माध्यम से भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है, हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की व्यापक आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है।
सीतारमण ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव व्यवसायों के कार्यशील पूंजी चक्र को प्रभावित कर सकता है और निर्यात ऑर्डर को लेकर अनिश्चितता पैदा कर सकता है।
उन्होंने स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक (सिडबी) और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के बीच एक को-लेंडिंग प्लेटफॉर्म सहित कई एमएसएमई-केंद्रित उपायों की घोषणा की, जिसका उद्देश्य ऋण पहुंच का विस्तार करना है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने सीजीटीएमएसई योजना के तहत एक विशेष माइक्रो क्रेडिट कार्ड शुरू किया है, जिससे उद्यम पोर्टल में पंजीकृत एमएसएमई 5 लाख रुपए तक के बिना गारंटी वाले ऋण प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, कैबिनेट ने ईसीएलजीएस 5.0 को मंजूरी दी है, जिससे एमएसएमई के लिए 2.55 लाख करोड़ रुपए तक के ऋण उपलब्ध हो सकेंगे।
सीतारमण ने आगे कहा कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से उपभोक्ताओं और व्यवसायों को बचाने के उद्देश्य से पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती के कारण सरकार को वित्त वर्ष 2027 में लगभग 1 लाख करोड़ रुपए के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

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