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राजस्थान में रामदेवरा की यात्रा केवल एक धार्मिक पड़ाव तक पहुंचने का सफर नहीं है। पाली से जोधपुर और फिर रामदेवरा की ओर बढ़ते हुए रास्ते में कई ऐसे धार्मिक स्थल मिलते हैं, जो स्थानीय आस्था, लोकविश्वास, स्थापत्य और राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराते हैं। खास बात यह है कि इनमें कुछ स्थान मुख्य मार्ग के काफी करीब हैं, जबकि कुछ के लिए थोड़ी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में रामदेवरा जाने वाले यात्री अपनी यात्रा को सिर्फ दर्शन तक सीमित रखने के बजाय इन जगहों को भी मार्ग के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देख सकते हैं। ओम बन्ना धाम, जहां बाइक की होती है पूजा
पाली से जोधपुर की ओर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पाली से करीब 20 किलोमीटर दूर चोटिला गांव के पास ओम बन्ना धाम स्थित है। यह राजस्थान के उन अनोखे धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां किसी पारंपरिक प्रतिमा के बजाय 350 सीसी रॉयल एनफील्ड बुलेट मोटरसाइकिल की पूजा की जाती है। ओम सिंह राठौड़ से जुड़े लोकविश्वास के कारण यह स्थान लंबे समय से यात्रियों के बीच खास पहचान रखता है।
हाईवे से गुजरने वाले लोग यहां रुककर दर्शन करते हैं और सुरक्षित यात्रा की कामना करते हैं। रामदेवरा जाने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए यह पड़ाव राजस्थान के लोकविश्वास और सड़क किनारे विकसित हुई अनूठी धार्मिक परंपरा को करीब से देखने का अवसर देता है।
सोनाणा खेतलाजी धाम में लोकआस्था का अनुभव
पाली जिले के देसूरी-सारंगवास क्षेत्र के पास श्री सोनाणा खेतलाजी का धाम भी इस यात्रा मार्ग के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां खेतलाजी को क्षेत्रपाल देव के रूप में पूजा जाता है। स्थानीय लोगों के साथ रामदेवरा की ओर जाने वाले श्रद्धालु भी यहां दर्शन करते हैं।
भाद्रपद और चैत्र के महीनों में यहां बड़े मेले का आयोजन होता है, जिससे इस स्थान का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और बढ़ जाता है। राजस्थान की लोकदेवता परंपरा को समझने के लिहाज से भी यह जगह यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव बन सकती है।
कापरड़ा जैन तीर्थ में मिलेगी शांति
पाली-जोधपुर मार्ग पर बिहाड़ा-कापरड़ा के आसपास स्थित कापरड़ा जैन तीर्थ धार्मिक यात्रा के साथ स्थापत्य और शांत वातावरण पसंद करने वाले यात्रियों को भी आकर्षित करता है। यह तीर्थ भगवान पार्श्वनाथ से जुड़ा है और अपनी वास्तुकला तथा शांत परिवेश के लिए जाना जाता है।
रामदेवरा की लंबी यात्रा के दौरान यहां कुछ समय रुकना यात्रियों के लिए अलग अनुभव हो सकता है। धार्मिक वातावरण के साथ मंदिर की स्थापत्य विशेषताओं को देखना और कुछ देर शांत वातावरण में बिताना यात्रा के अनुभव को अधिक विविध बना देता है।
ओसियां में मंदिरों और प्राचीन विरासत की दुनिया
जोधपुर से आगे रामदेवरा की ओर जाते समय थोड़ी दूरी तय करके ओसियां पहुंचा जा सकता है। थार मरुस्थल के प्रवेश क्षेत्र में स्थित ओसियां अपने प्राचीन मंदिरों और बारीक नक्काशी वाली स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। यहां सच्चियाय माता का मंदिर श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है, जबकि प्राचीन जैन मंदिर इस क्षेत्र की समृद्ध स्थापत्य परंपरा की झलक देते हैं।
आठवीं से बारहवीं शताब्दी के बीच विकसित मंदिर स्थापत्य की विरासत के कारण ओसियां धार्मिक पर्यटन के साथ इतिहास और कला में रुचि रखने वाले यात्रियों के लिए भी खास महत्व रखता है। रामदेवरा की यात्रा में ओसियां को शामिल करने से एक ही सफर में राजस्थान की लोकआस्था, मंदिर वास्तुकला और ऐतिहासिक विरासत को देखने का अवसर मिलता है।
मसूरिया पहाड़ी पर गुरु बालीनाथ के दर्शन
जोधपुर शहर में प्रवेश करते समय मसूरिया पहाड़ी पर स्थित गुरु बालीनाथ का मंदिर भी रामदेवरा जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। स्वामी बालीनाथ को बाबा रामदेव जी का गुरु माना जाता है और इसी वजह से रामदेवरा यात्रा में इस स्थान की विशेष धार्मिक मान्यता है।
कई श्रद्धालु रामदेवरा पहुंचने से पहले मसूरिया धाम जाकर गुरु बालीनाथ के दर्शन करते हैं। शहर के बीच स्थित यह धार्मिक स्थल यात्रा के उस हिस्से को जोड़ता है, जहां श्रद्धालु बाबा रामदेव से जुड़े धार्मिक संदर्भों को आगे बढ़ते हुए रामदेवरा की ओर रवाना होते हैं।
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