
It is recommended that you update your browser to the latest browser to view this page.
Please update to continue or install another browser.
Update Google Chromeब्रेकिंग न्यूज़
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष यह व्रत 22 सितंबर को रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं में इस एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी के साथ-साथ पार्श्व और वामन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान क्षीरसागर में योगनिद्रा में विराजमान भगवान विष्णु इस दिन करवट बदलते हैं। इसी वजह से इस एकादशी का नाम परिवर्तिनी एकादशी पड़ा। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात से शुरू होकर 22 सितंबर की रात तक रहने की बात कही गई है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन भगवान विष्णु की आराधना, व्रत और आत्मसंयम के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन नियम और श्रद्धा के साथ व्रत रखते हैं तथा भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का स्मरण करते हुए सात्विक जीवन, संयम और सेवा का संकल्प लेते हैं। धार्मिक मान्यताओं में परिवर्तिनी एकादशी के व्रत को पुण्यदायी बताया गया है।
पीले फूल और तुलसी से करें भगवान विष्णु की पूजा
परिवर्तिनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करने की परंपरा है। इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजन के दौरान भगवान विष्णु को जल, पंचामृत, पीले फूल, चंदन, अक्षत और तुलसी दल अर्पित किए जाते हैं।
इसके बाद धूप और दीप जलाकर भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। पूजन के समय 'नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। भगवान विष्णु को पीले फल या मिष्ठान का भोग लगाया जा सकता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार विष्णु सहस्रनाम, विष्णु स्तुति या एकादशी व्रत कथा का पाठ कर सकते हैं।
शाम के समय भी भगवान विष्णु की आरती करने की परंपरा है। इसके साथ ही तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान के स्मरण और पूजा के साथ सात्विक आचरण पर विशेष ध्यान देने की धार्मिक मान्यता है।
अपनी क्षमता के अनुसार रखें व्रत
एकादशी के व्रत में सामान्य रूप से अन्न और अनाज का सेवन नहीं किया जाता। श्रद्धालु अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार निर्जल, फलाहार या सात्विक आहार के साथ व्रत रख सकते हैं। फल, दूध, मेवे और व्रत में स्वीकार्य अन्य आहार का सेवन किया जा सकता है। जो लोग निर्जल व्रत रखने में सक्षम नहीं हैं, वे स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए फलाहार कर सकते हैं।
व्रत के दौरान भगवान विष्णु का स्मरण, भजन-कीर्तन और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखने से जाने-अनजाने में किए गए पापों के क्षय, सुख-समृद्धि और भगवान विष्णु की कृपा की प्राप्ति होती है। इसे पुण्य प्रदान करने वाला व्रत माना गया है।
द्वादशी तिथि में करें व्रत का पारण
परिवर्तिनी एकादशी के व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में करने की परंपरा है। व्रत का उद्देश्य केवल भोजन से परहेज करना नहीं माना गया है, बल्कि इस दिन इंद्रियों पर नियंत्रण, सात्विक आचरण, संयम और भगवान के प्रति भक्ति की भावना को जीवन में उतारने पर भी जोर दिया जाता है। इसी भाव के साथ श्रद्धालु परिवर्तिनी एकादशी का व्रत और पूजन करते हैं।
राजस्थान निकाय चुनाव : आज चुने जाएंगे डिप्टी मेयर, उपसभापति और उप . . .
2026-09-22 13:19:16
धर्मांतरण के लिए बेल्जियम से आए 5.10 करोड़ रुपए : एजुकेशन और कल् . . .
2026-09-22 13:17:39
कांग्रेसियों को हमेशा अपनी कुर्सी का डर रहता था, इसलिए हर तीन-तीन . . .
2026-09-22 12:48:11
जयपुर जिला पावरलिफ्टिंग एसोसिएशन के चुनाव संपन्न: सत्येन्द्र सिंह . . .
2026-09-22 13:21:00
बीजेपी ने बेईमानी-बेशर्मी की हदें पार की:अफसर-पुलिसवाले भी पाप मे . . .
2026-09-22 12:51:04
डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने लोकमंथन यात्रा को किया रवाना . . .
2026-09-21 13:12:16