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दीपावली पर 61 साल बाद बना ऐसा संयोग, 31 अक्टूबर को ही दिवाली पूजा शास्त्रसम्मत
By Lokjeewan Daily - 29-10-2024

धनतेरस से दीपावली के पर्व की शुरुआत हो जाती है लेकिन इस बार दिवाली की तिथि को लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति बनी हुई है। दिवाली पर अभी जैसी स्थिति बनी हुई है, ऐसी ही स्थिति साल 1963 में बनी थी और उस समय भी दिवाली की सही तिथि को लेकर कन्फ्यूजन था। दीपावली 2024 पर इस साल जैसी ही परिस्थिति 1963 में भी हुई थी, तब पिछले दिन ही दीपावली मनाई गई थी। देश के पुराने श्रीमद् बापूदेव शास्त्री पंचांग की 1963 की फोटों पर नजर डालें, तो समझ आएगा। श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के सचिव, अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता और गाजियाबाद में श्री दूधेश्वर नाथ मंदिर के पीठाधीश्वर महंत नारायण गिरी ने बताया कि 16 अक्टूबर 1963 में अमावस्या सायंकाल 16:15 पर प्रारंभ हो रही थी  और 17 अक्टूबर 1963 को सूर्यास्त 17:29 बजे और अमावस्या सायंकाल 18:13 पर समाप्त हो रही थी । लेकिन, दीपावली 16 अक्टूबर को ही लिखी गई, क्योंकि उस दिन ही पूरे प्रदोष व अर्धरात्रि में था। ऐसी ही स्थिति अब है तो 31 अक्टूबर को ही दिवाली पर लक्ष्मी पूजन होनी चाहिए। अपनी परंपराओं को खंडित नहीं करें। इस षडयंत्र से बाहर निकलें। इस गंभीर विषय पर मौन नहीं होना चाहिए।
अमावस्या का अंत व सूर्यास्त एक समान
महंत ने कहा कि 1963 और 2024 में तो अमावस्या का अंत व सूर्यास्त एक समान है। 2024 में 1 नवंबर को सूर्यास्त 17:32 बजे और अमावस्या अंत 18:16 पर है। लेकिन, 1963 में पिछले दिन ही दीपावली की गई थी, क्योंकि अगले दिन दूषित प्रदोष, प्रदोष में दर्श नहीं, रजनी में एक दण्ड अमावस्या का योग नहीं, प्रदोष में अमा व्याप्ति नहीं, अर्धरात्रि में अमावस्या नहीं थी, यह सब पिछले दिन पूरी तरह मिल रहा था, ये इस साल भी मिल रहा है।

'पहले गणना हाथों से होती थी, आज की तरह कॉपी पेस्ट नहीं'
महंत नारायण गिरी ने कहा कि 1963 के इन प्रमाणों से स्पष्ट है, परंपरा के अनुसार 31 अक्टूबर 2024 को ही दीपावली शास्त्रसम्मत है, अन्यथा क्या आज ज्यादा विद्वान हो गए हैं या पहले के आचार्य व पंचांगकार शास्त्र नहीं जानते थे? आज से 60 साल पहले के ये पंचांग हैं, जब पंचांग की एक-एक गणना हाथों से की जाती थी, न कि आज की तरह कॉपी पेस्ट की जाती थी।

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