It is recommended that you update your browser to the latest browser to view this page.

Please update to continue or install another browser.

Update Google Chrome

प्रदोष व्रत 2026: फाल्गुन मास का अंतिम प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा, जानें शुभ मुहूर्त और सरल पूजा विधि
By Lokjeewan Daily - 26-02-2026

फाल्गुन मास अब अपने अंतिम चरण में है और इसी के साथ इस महीने का आखिरी प्रदोष व्रत भी आने वाला है। सनातन परंपरा में प्रदोष व्रत को भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाने वाला यह व्रत आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। फाल्गुन मास का अंतिम प्रदोष व्रत इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि यह नए महीने के आरंभ से पहले शिवभक्ति का अंतिम अवसर प्रदान करता है।
कब है फाल्गुन मास का आखिरी प्रदोष व्रत
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्तमान में शुक्ल पक्ष चल रहा है। शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 28 फरवरी की रात्रि में होगा और इसका समापन अगले दिन 1 मार्च की शाम तक रहेगा। ऐसे में फाल्गुन मास का अंतिम प्रदोष व्रत 1 मार्च 2026 को रखा जाएगा। यह तिथि शिव उपासना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है और इस दिन व्रत रखने से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
इस बार कौन सा प्रदोष व्रत रहेगा
कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन मास का यह अंतिम प्रदोष व्रत रविवार के दिन पड़ रहा है। रविवार को पड़ने के कारण इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा। मान्यता है कि जिस दिन प्रदोष व्रत पड़ता है, उसी दिन के आधार पर उसका नाम रखा जाता है। रवि प्रदोष व्रत सूर्य तत्व से जुड़ा माना जाता है और इसमें शिव भक्ति के साथ अनुशासन और संयम का विशेष महत्व बताया जाता है।
रवि प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त
त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 28 फरवरी की रात लगभग आठ बजे के बाद मानी जा रही है, जबकि इसका समापन 1 मार्च की शाम तक रहेगा। पूजा के लिए दिन के समय भी शुभ अवसर उपलब्ध रहेगा, वहीं प्रदोष काल में की जाने वाली पूजा को विशेष फलदायी माना गया है। इस अवधि में भगवान शिव की आराधना करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
व्रत का पारण कब किया जाएगा
प्रदोष व्रत का पारण अगले दिन प्रातःकाल किया जाता है। रवि प्रदोष व्रत का पारण 2 मार्च 2026 को किया जाएगा। पारण के समय व्रत का विधिवत समापन किया जाता है, जिसे शास्त्रों में अत्यंत आवश्यक बताया गया है। सही समय पर पारण करने से व्रत का पुण्य पूर्ण रूप से प्राप्त होता है।
रवि प्रदोष व्रत की सरल पूजा विधि
प्रदोष व्रत के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं और व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद घर के मंदिर की साफ-सफाई कर भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा की जाती है। संध्या के समय प्रदोष काल में दीप प्रज्वलित कर शिव आराधना की जाती है और शिव मंत्रों का जप किया जाता है। मान्यता है कि इस समय की गई पूजा से शिव कृपा शीघ्र प्राप्त होती है और भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
फाल्गुन मास का अंतिम प्रदोष व्रत शिवभक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। रवि प्रदोष व्रत के रूप में आने वाला यह दिन संयम, श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन की अनुभूति होती है।

अन्य सम्बंधित खबरे