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एआई से बढ़ेगी उत्पादकता, लेकिन रोजगार पर असर को सावधानी से संभालना आवश्यक: रिपोर्ट
By Lokjeewan Daily - 05-10-2026

नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को दुनिया भर में एक परिवर्तनकारी तकनीक माना जा रहा है, जो उत्पादकता बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को नई गति देने की क्षमता रखती है। ग्राहक सेवा, चिकित्सा निदान, कोडिंग और कंटेंट निर्माण जैसे क्षेत्रों में एआई का बढ़ता उपयोग अभूतपूर्व संभावनाएं पैदा कर रहा है। हालांकि, एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि तकनीकी क्रांतियां हमेशा तुरंत व्यापक सामाजिक समृद्धि में परिवर्तित नहीं होतीं और एआई के दौर में रोजगार बाजार को लेकर विशेष सतर्कता की आवश्यकता होगी। इंडिया नैरेटिव में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, एआई ऐसी स्थिति पैदा कर सकता है जिसे आर्थिक इतिहासकार "एंगेल्स पॉज" कहते हैं। इसका अर्थ है कि उत्पादकता और संपत्ति में तेज वृद्धि तो होती है, लेकिन आम कामगारों की आय और जीवन स्तर में सुधार काफी देर से दिखाई देता है। लेख में ब्रिटेन की औद्योगिक क्रांति का उदाहरण दिया गया है। 19वीं सदी में औद्योगिक उत्पादन में भारी वृद्धि हुई, लेकिन श्रमिकों के जीवन स्तर और आय में सुधार आने में काफी समय लगा। इससे यह संकेत मिलता है कि तकनीकी प्रगति के लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचने में समय लग सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछली औद्योगिक क्रांतियों ने बड़े पैमाने पर रोजगार इसलिए पैदा किए क्योंकि उन्होंने पूरी तरह नए उद्योगों को जन्म दिया। वस्त्र उद्योग ने फैक्टरी नौकरियां पैदा कीं, ऑटोमोबाइल उद्योग ने विनिर्माण और सेवाओं में लाखों रोजगार दिए, जबकि डिजिटल क्रांति ने सॉफ्टवेयर, ई-कॉमर्स और प्लेटफॉर्म आधारित अर्थव्यवस्था विकसित की। एआई भी भविष्य में ऐसे नए पेशे पैदा कर सकता है जिनकी आज कल्पना करना मुश्किल है, लेकिन संक्रमण का दौर चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह बदलाव और अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत ने आईटी आउटसोर्सिंग, बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट और कस्टमर सपोर्ट जैसे श्रम-प्रधान सेवा क्षेत्रों के माध्यम से वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान बनाई है। लेकिन अब बुनियादी कोडिंग, डेटा एंट्री, ग्राहक सहायता और दस्तावेज प्रसंस्करण जैसे कई कार्य एआई द्वारा कम लागत और अधिक गति से किए जा सकते हैं।
हालांकि रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि एआई भारत के लिए बड़े अवसर लेकर आया है। कृषि उत्पादकता बढ़ाने, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, लॉजिस्टिक्स को अधिक कुशल बनाने, शिक्षा की पहुंच बढ़ाने और शासन व्यवस्था को प्रभावी बनाने में एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत के कई स्टार्टअप फिनटेक, भाषा प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में एआई आधारित समाधान विकसित कर रहे हैं।
लेख के अनुसार, असली चुनौती एआई को अपनाने में नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने में है कि उससे होने वाले उत्पादकता लाभ समाज के बड़े हिस्से तक पहुंचें और केवल कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित न रह जाएं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि औद्योगिक क्रांति के दौरान सरकारें शुरुआत में श्रमिकों की बिगड़ती स्थिति और बढ़ती असमानता पर पर्याप्त तेजी से प्रतिक्रिया नहीं दे सकीं। बाद में श्रमिक आंदोलनों, श्रम अधिकारों, सार्वजनिक शिक्षा और सामाजिक कल्याण नीतियों के माध्यम से संतुलन स्थापित किया गया।
लेख का तर्क है कि एआई के युग में भी इसी तरह की संस्थागत तैयारियों की आवश्यकता होगी। नीति निर्माताओं को रोजगार बाजार में बदलाव के लिए पहले से तैयारी करनी होगी, ताकि तकनीकी परिवर्तन सामाजिक अस्थिरता का कारण न बने।
रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर डिजिटल शिक्षा, अपस्किलिंग और री-स्किलिंग कार्यक्रमों में निवेश की जरूरत पर जोर दिया गया है। विश्वविद्यालयों और व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों को तेजी से बदलती कौशल आवश्यकताओं के अनुसार अपने पाठ्यक्रमों में बदलाव करना होगा।
साथ ही, तकनीकी बदलाव से प्रभावित होने वाले कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा तंत्र को भी मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई गई है।

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