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नई दिल्ली । परिसीमन बिल को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को लोकसभा में स्पष्ट और सख्त संदेश देते हुए कहा कि देश में होने वाली यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष होगी और किसी भी राज्य या क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह निर्णय देश की एकता और संविधान की भावना के अनुरूप होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में कहा कि मैं आज जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूं कि चाहे दक्षिण हो, उत्तर हो, पूर्व हो या पश्चिम, छोटे राज्य हों या बड़े, यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव या अन्याय नहीं करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पहले हुए परिसीमन के दौरान जो अनुपात तय किया गया था, उसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और आगे की वृद्धि भी उसी अनुपात में होगी। उन्होंने विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि अगर किसी को भरोसा चाहिए तो वह गारंटी देने को भी तैयार हैं। अगर गारंटी चाहिए तो मैं गारंटी देता हूं, वादा चाहिए तो वादा देता हूं। जब नीयत साफ होती है तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं होती। कुछ लोग इस प्रक्रिया को उनके राजनीतिक स्वार्थ से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन यह पूरी तरह गलत है। अगर आप इसका विरोध करेंगे तो स्वाभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे मिल सकता है, लेकिन अगर साथ चलेंगे तो किसी का नुकसान नहीं होगा। हमें किसी क्रेडिट की जरूरत नहीं है। उन्होंने यहां तक कहा कि बिल पारित होने के बाद वह सभी दलों को श्रेय देने के लिए तैयार हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि देश को क्षेत्रीय नजरिए से बांटकर नहीं देखा जा सकता। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हम एक देश हैं। हमें देश को टुकड़ों में सोचने का कोई अधिकार नहीं है।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने नारी सशक्तीकरण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अधिकार देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका हक है। हम यह न सोचें कि हम नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं, यह उनका अधिकार है, जिसे दशकों से रोका गया है। आज हमें उस गलती का प्रायश्चित करने का अवसर मिला है। लोकतंत्र की जननी होने के नाते, यह भारत की सांस्कृतिक प्रतिबद्धता है। इसी प्रतिबद्धता के कारण पंचायतों में ऐसी व्यवस्था स्थापित की गई।
प्रधानमंत्री ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि संवेदनशील मुद्दों को सुलझाने में अनुभव और प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पंचायत स्तर पर किए गए प्रयोगों ने यह साबित किया है कि सही नीयत और अनुभव से बड़े बदलाव संभव हैं। मैंने लंबे समय तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया है। मेरा अनुभव यह है कि संवेदनशील मुद्दों को सुलझाने की प्रतिबद्धता लाभकारी सिद्ध होती है। जैसे-जैसे अनुभव गहराता है, उसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।
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