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फिल्म ‘बॉर्डर 2’ भारत-पाक युद्ध 1971 की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें थलसेना, वायुसेना और नौसेना के जांबाज़ जवानों की बहादुरी को एक साथ पिरोया गया है। कहानी तीन दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो नेशनल वॉर अकादमी में साथ ट्रेनिंग लेते हैं और बाद में अलग-अलग सेनाओं का हिस्सा बनते हैं। शादी की खुशियों के बीच अचानक युद्ध की आहट सुनाई देती है और तीनों अपने-अपने मोर्चों पर देश की रक्षा के लिए निकल पड़ते हैं। पश्चिमी सीमा पर सीमित संसाधनों के बावजूद दुश्मन को रोकने की चुनौती फिल्म की कहानी को रोमांचक मोड़ देती है।
फिल्म की कहानी सिनेमाई होने के साथ-साथ जानकारी भी देती है और 1971 युद्ध के कई अनछुए पहलुओं को सामने लाती है। पटकथा को इस तरह गढ़ा गया है कि दर्शक बिना उलझे युद्ध की गंभीरता को समझ सकें। संवाद भावनात्मक, देशभक्ति से भरपूर और कई जगह तालियां बजवाने वाले हैं। फिल्म सिर्फ युद्ध नहीं दिखाती, बल्कि जवानों के मन के द्वंद्व, दोस्ती और परिवार से जुड़े जज़्बातों को भी मजबूती से पेश करती है।
निर्देशक अनुराग सिंह की सबसे बड़ी ताकत यह है कि उन्होंने कहानी को सरल और प्रभावी रखा है। युद्ध के दृश्य भव्य होने के बावजूद भ्रम पैदा नहीं करते और दर्शकों को अंत तक बांधे रखते हैं। फिल्म में मास अपील का खास ध्यान रखा गया है, खासकर इंटरवल से पहले का सीन और अंतिम 15 मिनट दर्शकों में जबरदस्त जोश भर देते हैं। इसके साथ ही भावनात्मक और हल्के-फुल्के पल भी कहानी को संतुलित बनाते हैं।
सनी देओल एक बार फिर अपने क्लासिक अंदाज़ में नजर आते हैं और भावनात्मक तथा युद्ध दोनों दृश्यों में गहरी छाप छोड़ते हैं। उनके कुछ डायलॉग और सीन पुराने दौर की याद दिलाते हैं। वरुण धवन अपने करियर के सबसे गंभीर और प्रभावशाली रोल में दिखाई देते हैं और अपने किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाते हैं। दिलजीत दोसांझ सहज और प्रभावी लगते हैं, जबकि अहान शेट्टी ने भी अपनी भूमिका में पूरी कोशिश की है। महिला कलाकारों में मोना सिंह सबसे ज्यादा असर छोड़ती हैं। सहायक कलाकार और विलेन भी कहानी को मजबूती देते हैं।
फिल्म का संगीत इसकी जान है और कई गाने सीधे दिल को छूते हैं। देशभक्ति और भावनाओं से भरे गीत कहानी के साथ अच्छे से घुलते हैं। बैकग्राउंड स्कोर युद्ध दृश्यों की गंभीरता को और बढ़ाता है। एक्शन सीक्वेंस प्रभावशाली हैं और प्रोडक्शन डिजाइन व कॉस्ट्यूम्स फिल्म को यथार्थ के करीब लाते हैं। एडिटिंग संतुलित है, हालांकि कुछ दृश्य छोटे किए जा सकते थे।
कुल मिलाकर ‘बॉर्डर 2’ एक भव्य, भावनात्मक और जोशीली वॉर फिल्म है, जो 1997 की क्लासिक ‘बॉर्डर’ की विरासत को आगे बढ़ाती है। फिल्म दिल और जांबाज़ी के बीच सही संतुलन बनाती है और जब पूरी रफ्तार पकड़ती है, तो दर्शकों को सीट से बांध देती है। क्लाइमेक्स के दृश्य थिएटर में जबरदस्त माहौल बनाने की ताकत रखते हैं। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म के मजबूत ओपनिंग करने की पूरी उम्मीद है और यह साल की बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शामिल हो सकती है।
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