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- शास्त्री नगर जिनालय में 1 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने रचा नया इतिहास
- 24 घंटे अनवरत गूंजे पावन मंत्र; तय लक्ष्य से अधिक रिकॉर्ड 5499 पाठ पूर्ण
भीलवाड़ा लोकजीवन (लोकेश सोनी) । शहर के शास्त्री नगर स्थित श्री पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भक्ति, साधना और समर्पण का एक ऐसा अनूठा इतिहास रच दिया गया है, जो भीलवाड़ा के धार्मिक इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा। मुनि पुंगव सुधासागर महाराज की पावन प्रेरणा से गत 1 मई से निरंतर गतिमान 48 दिवसीय अखंड भक्तामर महाआराधना का गुरुवार, 18 जून को अत्यंत वैभवशाली, गरिमामय और व्यवस्थित माहौल में भव्य निष्ठापन हुआ। इस ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान के चरम पड़ाव पर श्रद्धालुओं की अगाध श्रद्धा का ऐसा अभूतपूर्व सैलाब उमड़ा कि पूरा क्षेत्र जयकारों से गुंजायमान हो उठा। पूरे आयोजन के दौरान करीब 1 लाख से अधिक श्रावक-श्राविकाओं ने सामूहिक व व्यक्तिगत रूप से अपनी हाजिरी दर्ज कराकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है, जो भीलवाड़ा के किसी एकल जैन मंदिर में श्रद्धालुओं की सामूहिक भागीदारी का अपने आप में पहला और अनूठा रिकॉर्ड है। इस महाअनुष्ठान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अखंडता और निरंतरता रही, जिसके तहत मंदिर परिसर में चौबीसों घंटे बिना रुके भक्तामर स्तोत्र की पावन ऋचाएं गूंजती रहीं। आयोजन समिति ने पूरे 48 दिनों में 4800 भक्तामर पाठ पूर्ण करने का पावन संकल्प लिया था, जिसे पार करते हुए श्रद्धालुओं ने कुल 5499 पाठ पूर्ण किए। इस महासंकल्प को सिद्ध करने के लिए श्रद्धालुओं को 24 विशेष टीमों में विभाजित किया गया था, जिसमें करीब 150 से अधिक समर्पित श्रद्धालु दिन-रात शिफ्टों के अनुसार चौबीसों घंटे निरंतर साधना में लीन रहे और गुरुवार प्रात: 6.12 बजे इस अखंड पाठ का पूर्ण निष्ठापन हुआ। मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य विजय झांझरी ने बताया कि इस 48 दिवसीय अखंड साधना से समाज में सकारात्मकता, परम शांति, आपसी सद्भाव एवं धार्मिक चेतना का एक नया और अभूतपूर्व वातावरण निर्मित हुआ है।
कुदरत और अध्यात्म का अद्भुत गणित: अंक 9 का दिव्य संयोग
इस महामहोत्सव के समापन पर प्रकृति, समय और अध्यात्म का एक ऐसा अनूठा गणितीय तालमेल देखने को मिला, जिसने हर श्रद्धालु को चमत्कृत कर दिया। पूरे आयोजन में 'अंक 9' का यह दिव्य संयोग दिनभर चर्चा का विषय बना रहा। यह ऐतिहासिक भक्तामर निष्ठापन 18 तारीख को संपन्न हुआ, जिसका अंक जोड़ (1+8) 9 बैठता है। वहीं 48 दिनों में कुल 5499 पाठ पूर्ण हुए, जिनका कुल योग (5+4+9+9 = 27, और 2+7) करने पर भी 9 आता है। भगवान की भव्य पालकी यात्रा प्रात: 6:39 बजे शुरू हुई, जिसका अंक योग (6+3+9 = 18, और 1+8) 9 होता है, तो अखंड साधना का अंतिम पाठ प्रात: 6:12 बजे समाप्त हुआ, जिसका अंक योग (6+1+2) भी 9 बैठता है। इसके अलावा सहस्त्रनाम मंत्रों से महाअभिषेक करने वाले श्रावकों की कुल संख्या 189 रही, जिसका योग (1+8+9 = 18, और 1+8) 9 आता है तथा स्वर्ण कलश से पावन शांतिधारा करने का सौभाग्य कुल 9 पुण्यार्जक परिवारों को प्राप्त हुआ।
शास्त्रीनगर का जिनालय स्वयं नवग्रह भगवान का मंदिर
विशेष और चमत्कारी बात यह भी है कि शास्त्री नगर का यह भव्य जिनालय स्वयं नवग्रह भगवान का मंदिर है। महासमापन के विशेष अनुष्ठानों के तहत गुरुवार सुबह से ही मंदिर परिसर का नजारा अत्यंत अलौकिक था, जहां पुरुष श्रद्धालु पारंपरिक धोती-दुपट्टा धारण कर और महिला श्रद्धालु केसरिया साड़ी में सजे-धजे नजर आए। प्रात: 6:39 बजे मूलनायक भगवान आदिनाथ की भव्य एवं नयनाभिराम पालकी यात्रा शास्त्री नगर दिगंबर जैन मंदिर से गाजे-बाजे के साथ निकाली गई। धर्मध्वजाओं और पारंपरिक बैंड की मधुर धुन के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने गगनभेदी जयकारों से पूरे नगर को गुंजायमान कर दिया। इस शोभायात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण महिलाओं द्वारा निकाली गई भव्य जिनवाणी यात्रा थी, जिसमें भक्तामर के 48 श्लोकों और काव्यों के प्रतीक स्वरूप 48 सौभाग्यवती महिलाएं अपने मस्तक पर जिनवाणी धारण कर और हाथों में धर्म ध्वजाएं लहराते हुए चल रही थीं।
आदिनाथ भगवान का 1008 सहस्त्रनाम मंत्रावली के साथ मस्तकाभिषेक
शोभायात्रा के पुन: मंदिर परिसर आगमन के पश्चात मुख्य वेदी पर देवाधिदेव मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान एवं विधि नायक आदिनाथ भगवान का 1008 सहस्त्रनाम मंत्रावली के साथ भव्य मस्तकाभिषेक एवं परम शांतिधारा संपन्न की गई, जिसमें 189 श्रावकों ने सहभागिता की। इसके तुरंत बाद 'भक्तामर महामंडल विधान' के तहत 48 श्रावक-श्राविकाओं के जोड़ों ने सस्वर संगीतमय मंत्रोच्चार के साथ विधान मंडल पर 48 श्रीफल (नारियल) समर्पित किए। अंत में एक कुंडीय हवन आयोजित किया गया, जिसमें विश्व कल्याण, राष्ट्र समृद्धि, मानव शांति और सामाजिक समरसता की कामना के साथ आहुतियां दी गईं।
इन परिवारों को शांतिधारा करने का सौभाग्य
मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रवीण कुमार चौधरी के अनुसार, स्वर्ण कलश से प्रथम अभिषेक एवं पावन शांतिधारा करने का परम सौभाग्य भीलवाड़ा के प्रमुख परिवारों को प्राप्त हुआ, जिनमें मुख्य रूप से छगनलाल, महेंद्र, राजेंद्र टोंग्या परिवार; जयकुमार सौरभ पाटनी परिवार; दिलीप, प्रवीण, नवीन चौधरी परिवार; राजेंद्र, सौरभ, साहिल गंगवाल परिवार; दिलीप, श्रवण, विनीत कोठारी परिवार; प्रेमचंद, राजेंद्र सेठी परिवार; सुशील, सुनील, लोकेंद्र जैन परिवार तथा प्रकाशचंद, नवीन, निर्मल, नीरज चौधरी परिवार शामिल हैं। मुख्य आयोजक टोंग्या परिवार एवं सकल दिगंबर जैन समाज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में भीलवाड़ा शहर की सभी 18 दिगंबर जैन मंदिर समितियों के पदाधिकारियों सहित देश के विभिन्न कोनों से आए श्रद्धालुओं तथा युवाओं व बच्चों ने अपनी अनुकरणीय भागीदारी निभाकर इस धार्मिक उत्सव को भीलवाड़ा के इतिहास में अमर कर दिया।
टोंग्या भक्तामर आराधना रत्न की उपाधि से विभूषित
सकल दिगंबर जैन समाज कार्यकारिणी द्वारा छगनलाल टोंग्या को उनकी भक्ति समर्पण और इस अनुष्ठान को भावना करने में योगदान देने पर सकल दिगंबर जैन समाज भीलवाड़ा द्वारा उन्हें भक्तामर आराधना रत्न की उपाधि से विभूषित किया।इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी,उपाध्यक्ष जंबू भैंसा, प्रकाश गंगवाल,महामंत्री लोकेश अजमेरा,मंत्री नरेश गोधा तनसुख गदिया,अशोक कांटीवाल,मुकेश पाटनी सहित अनेक सदस्य उपस्थित थे।
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