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भीलवाड़ा लोकजीवन। जून के तीन हफ्ते बीत जाने के बाद भी भीलवाड़ा की धरती मानसून की पहली फुहार के लिए तरस रही है, और अब यह इंतजार शहरवासियों के सब्र का इम्तिहान ले रहा है। आसमान में बादलों का डेरा देखकर लोग रोज सोचते है कि शायद आज राहत बरस जाएगी, लेकिन रोज उम्मीदों पर पानी फिर रहा है। बारिश तो हो नहीं रही, लेकिन हवा में मौजूद भारी नमी और तीखी धूप के गठजोड़ ऐसी भीषण उमस पैदा कर रहे है कि लोग दिनभर पसीने से तरबतर हो रहे। दोपहर होते-होते बाजारों, दफ्तरों और सार्वजनिक जगहों पर हालात बदतर हो रहे है ,चिपचिपी गर्मी के कारण लोगों का दम फूल रहा है। इस बार मौसम की मार ऐसी है कि घरों के भीतर चल रहे पंखे और कूलर भी हवा फेंकने के बजाय केवल उमस बढ़ा रहे हैं, जिससे न तो दिन में चैन मिल रहा है और न ही रात को सुकून की नींद आ पा रही है।
सेहत पर भारी पड़ता मौसम: अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की कतारें
मौसम का यह बदला हुआ मिजाज अब केवल बेचैनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती कतारें इस बात की गवाह हैं कि यह उमस भरी गर्मी लोगों को बीमार कर रही है। डॉक्टरों के चैंबर में सबसे ज्यादा बुजुर्ग पहुंच रहे हैं, जिन्हें इस भारी मौसम के कारण अचानक घबराहट, बेचैनी और सांस लेने में तकलीफ जैसी गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर, बच्चे और युवा भी इस मौसम के चक्रव्यूह से बच नहीं पा रहे हैं; डिहाइड्रेशन के कारण उनमें उल्टी-दस्त और मौसमी बीमारियों के लक्षण तेजी से उभर रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस स्थिति को देखते हुए साफ चेतावनी दी है कि लोग बिना किसी जरूरी काम के तेज धूप में बाहर न निकलें, लगातार पानी पीते रहें और खान-पान में पूरी सावधानी बरतें।
अब सिर्फ आसमान पर टकटकी: मौसम विभाग ने जगाई राहत की उम्मीद
शहर के बुजुर्गों का कहना है कि आमतौर पर जून के तीसरे सप्ताह तक भीलवाड़ा में मानसून की रफ्तार दिखने लगती थी, लेकिन इस बार की देरी ने पूरी दिनचर्या को अस्त-व्यस्त कर दिया है। हालांकि, इन सबके बीच राहत की बात सिर्फ इतनी है कि मौसम विशेषज्ञों ने आने वाले दिनों में मानसूनी गतिविधियों के दोबारा सक्रिय होने और तेजी पकडऩे की संभावना जताई है। इसी एक उम्मीद के सहारे, तपती सडक़ों और बंद कमरों में पसीना बहाते भीलवाड़ा के लोग हर पल आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं, कि कब घने बादल बरसें और इस असहनीय उमस के दौर का अंत हो।
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