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मांडल अस्पताल बना बीमारियों का अड्डा, बदहाल व्यवस्था, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
By Lokjeewan Daily - 24-06-2026

भीलवाड़ा लोकजीवन।  एक ओर केंद्र व राज्य सरकार स्वच्छता और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर मांडल स्थित उप जिला चिकित्सालय की बदहाल सूरत इन दावों की धज्जियां उड़ाती नजर आ रही है। स्थिति यह है कि जो अस्पताल लोगों को जीवनदान देने और बीमारियां ठीक करने के लिए है, वही अब खुद बीमारियों का घर बनता जा रहा है। अस्पताल परिसर में चारों तरफ पसरी गंदगी और अव्यवस्थाओं को देखकर यहां आने वाले मरीजों और स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
चिकित्सालय के मुख्य द्वार और परिसर के भीतर की अव्यवस्थाएं जिम्मेदार प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। अस्पताल के बाहर मरीजों और तीमारदारों के लिए लगाई गई शुद्ध मीठे पानी की प्याऊ इस समय गंदगी से अटी पड़ी है। प्याऊ के आसपास लंबे समय से जमा कीचड़ और गंदा पानी मच्छरों के पनपने का मुख्य केंद्र बन चुका है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मौसमी बीमारियों के इस दौर में यहां डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी जानलेवा बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार मंडरा रहा है, लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं है। अस्पताल के भीतर का नजारा भी कुछ अलग नहीं है। पूरे परिसर में जगह-जगह कंटीली झाडय़िां उगी हुई हैं, कचरे के ढेर लगे हैं और आवारा पशु बेखौफ घूमते नजर आते हैं। इसके चलते मरीजों और उनके परिजनों को इलाज कराने के साथ-साथ यहां की असहनीय बदबू और गंदगी का सामना भी करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस संबंध में कई बार स्थानीय अस्पताल प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों को लिखित व मौखिक शिकायतें दी गईं, लेकिन हर बार आश्वासन के अलावा कोई ठोस कार्रवाई धरातल पर नजर नहीं आई। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग किसी बड़ी महामारी या हादसे के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठा है? क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि चिकित्सालय परिसर में तत्काल प्रभाव से विशेष सफाई अभियान चलाया जाए। प्याऊ के पास जमा गंदे पानी की निकासी कर कंटीली झाडय़िों को हटाया जाए, ताकि अस्पताल पहुंचने वाले जरूरतमंद मरीजों को एक स्वच्छ, सुरक्षित और गरिमापूर्ण वातावरण मिल सके।

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