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आईपीएस माधव के भ्रष्टाचार का कच्चा चिट्ठा सरकार के पास पहुंचा, 24 लाख का संदिग्ध लेन-देन
By Lokjeewan Daily - 25-06-2026

- सीआई से 3 लाख की वसूली का भी खुलासा
भीलवाड़ा लोकजीवन।  सहायक पुलिस अधीक्षक (सदर) रह चुके एपीओ आईपीएस अधिकारी माधव उपाध्याय के खिलाफ भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के मामले की जांच फाइल अब अंतिम निर्णय के लिए राज्य सरकार के पास पहुंच गई है। विजिलेंस की गहन जांच के बाद यह अहम फाइल डीजीपी  के माध्यम से सरकार को भेजी गई है, जिससे पुलिस बेड़े और राजनीतिक गलियारों में भारी हडक़ंप मच गया है। जांच में आईपीएस अधिकारी के मोबाइल से मिलीं व्हाट्सएप चैट्स और सीडीआर से करीब 24 लाख रुपये के संदिग्ध लेन-देन की पुष्टि हुई है। यह पूरा मामला भीलवाड़ा जिले के कोटड़ी इलाके में बड़े पैमाने पर होने वाले गारनेट के अवैध खनन और उससे होने वाली काली कमाई से जुड़ा हुआ है। राज्य सरकार ने परिवीक्षा काल (प्रोबेशन पीरियड) पर चल रहे आईपीएस माधव उपाध्याय को 24 अगस्त 2025 को भीलवाड़ा सदर का सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी) नियुक्त किया था। भीलवाड़ा में तैनाती के दौरान माधव की मुलाकात अजय पांचाल, नंद सिंह, नारायण गुर्जर, कालू गुर्जर और सौरभ काष्ठ नामक व्यक्तियों से हुई। आरोप है कि इसके बाद अजय पांचाल ने इलाके में अवैध खनन करने वाले माफियाओं से जबरन वसूली का खेल शुरू किया। जो खनन माफिया पैसा देने में आनाकानी करते, उन पर अजय पांचाल एएसपी माधव उपाध्याय से कहकर पुलिसिया कार्रवाई करवाता और उन्हें बुरी तरह धमकाता था। पुलिस की इसी धौंस के कारण धीरे-धीरे पूरा अवैध खनन माफिया गिरोह इन्हें मोटी रकम देने लगा।
व्हाट्सएप चैट से खुला राज, प्रत्येक से 50 हजार की बंधी
तत्कालीन एसपी धर्मेंद्र सिंह यादव  को जब इस अवैध वसूली की भनक लगी, तो उन्होंने तुरंत एक विशेष टीम बनाकर इसकी सीक्रेट जांच करवाई। पुलिस टीम ने सबसे पहले विधायक गोपीचंद मीणा के पीए अजय पांचाल को दबोचा, जिसने कबूल किया कि वह खनन माफियाओं से पैसा लेता है और पुलिस ने उससे वसूली की कुछ रकम भी रिकवर की। इसके बाद पुलिस ने नंद सिंह, नारायण गुर्जर और कालू गुर्जर को पकड़ा। कड़ाई से पूछताछ में भीलवाड़ा निवासी सौरभ काष्ठ का नाम सामने आया जो एक इलेक्ट्रिक शोरूम चलाता है। सौरभ ने कबूल किया कि वह सीधे आईपीएस माधव उपाध्याय के लिए ही काम करता था। मामले की जांच कर रहे जीआरपी एसपी नरेंद्र सिंह को सौरभ और आईपीएस माधव के मोबाइल से कई चौंकाने वाली व्हाट्सएप चैट्स मिली हैं, जिनमें साफ तौर पर दर्ज है कि पैसा कब और कहां पहुंचना है, कौन देने आएगा, कहां देगा और किस काम का पैसा आ रहा है। जांच टीम ने इस चैट और सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) के आधार पर पुष्टि की है कि दोनों के बीच करीब 24 लाख रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ है। कोटड़ी क्षेत्र में अवैध खनन में लगी प्रत्येक मशीन से हर महीने 50 हजार रुपये की बंधी
कोटड़ी सीआई से भी डरा-धमका कर वसूले थे 3 लाख
विजिलेंस की जांच रिपोर्ट में एक और शर्मनाक खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, कोटड़ी के तत्कालीन सीआई (थानाधिकारी) महावीर मीणा से भी आईपीएस माधव उपाध्याय ने डरा-धमका कर 3 लाख रुपये ऐंठ लिए थे। माधव ने सीआई को धमकी दी थी कि तुम्हारे खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही हैं और मैं तुम्हारे ऊपर सस्पेंशन की बड़ी कार्रवाई करूंगा। इस कार्रवाई का डर दिखाकर मामला शांत करने के नाम पर 3 लाख रुपये वसूले गए। विजिलेंस के पास इसके पुख्ता सबूत आ चुके हैं।
ब्यावर के युवक को भी बंधी के चक्कर में पीटा
जांच में यह भी सामने आया है कि पैसों के लेन-देन के एक अन्य विवाद में भीलवाड़ा पुलिस ने पवन नाम के एक व्यक्ति को ब्यावर से गलत तरीके से (जबरन) उठाया था। उसे पूछताछ के बहाने भीलवाड़ा लाया गया, जहां पुलिस कर्मियों ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की और बाद में मोटी मिलीभगत कर उसे बिना किसी कानूनी कार्रवाई के छोड़ दिया। इस पूरे घटनाक्रम में भी आईपीएस माधव उपाध्याय की भूमिका को पूरी तरह संदिग्ध माना गया है।

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