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भीलवाड़ा लोकजीवन। राजस्थान की परिवहन व्यवस्था और उससे जुड़े नियमों को लेकर ट्रांसपोर्टरों का असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। भीलवाड़ा गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के बैनर तले शनिवार को ट्रांसपोर्ट नगर बंद रहा। सभी व्यवसायियों ने रैली के रूप में जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर अध्यक्ष विश्वबंधु सिंह राठौड़ की अगुवाई में मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के नाम जिला कलक्टर को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में सरकार को आर-पार की लड़ाई की चेतावनी देते हुए मांगे पूरी करने के लिए सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो पूरे प्रदेश में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो सभी ट्रांसपोर्ट बंद जैसे कदम भी उठाए जाएंगे। भीलवाड़ा गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्वबंधु सिंह राठौड़ का कहना है कि लगातार बदलते नियम, बढ़ते टैक्स, अनिवार्य तकनीकी प्रावधान और भारी जुर्मानों ने परिवहन व्यवसाय को आर्थिक संकट में धकेल दिया है। ट्रांसपोर्ट क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था की धुरी है, लेकिन वर्तमान व्यवस्थाओं के कारण हजारों वाहन मालिक और लाखों परिवार अतिरिक्त आर्थिक बोझ झेल रहे हैं। उनका आरोप है कि नियमों का उद्देश्य व्यवस्था सुधारने के बजाय राजस्व संग्रह पर अधिक केंद्रित दिखाई देता है।
व्यवसायिक वाहनों में वीएलटीडी, जीपीएस से बढ़ रहा खर्च
ज्ञापन में सबसे प्रमुख आपत्ति व्यावसायिक वाहनों में अनिवार्य वीएलटीडी, जीपीएस व्यवस्था को लेकर जताई गई है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि एक ही वाहन में अलग-अलग विभागों और एजेंसियों के कारण कई प्रकार के ट्रैकिंग सिस्टम लगाने पड़ रहे हैं, जिससे अनावश्यक खर्च बढ़ रहा है। एसोसिएशन ने इसे स्वैच्छिक बनाने अथवा इसकी लागत पर प्रभावी नियंत्रण की मांग की है। साथ ही अधिकृत कंपनियों द्वारा मनमाने शुल्क वसूले जाने के आरोप लगाते हुए सरकार से दरें तय करने और निगरानी की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। प्रदेश में फिटनेस सेंटरों की कमी को भी गंभीर समस्या बताया गया।
सैकड़ों किलोमीटर यात्रा कर कराना पड़ रहा फिटनेस प्रमाणन
एसोसिएशन का कहना है कि व्यावसायिक वाहनों की संख्या की तुलना में फिटनेस जांच की सुविधाएं बेहद सीमित हैं। परिणामस्वरूप दूरदराज जिलों के वाहन मालिकों को सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर फिटनेस प्रमाणन कराना पड़ रहा है, जिससे समय और धन दोनों का नुकसान हो रहा है। संगठन ने नए फिटनेस सेंटर शुरू करने तथा परमिट और फिटनेस से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल और समयबद्ध बनाने की मांग रखी।
ई-चालान प्रणाली और भारी जुर्मानों पर पुनर्विचार की मांग
ज्ञापन में ई-चालान प्रणाली और भारी जुर्मानों पर भी पुनर्विचार की मांग की गई है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि मामूली तकनीकी या दस्तावेजी त्रुटियों पर भी अत्यधिक आर्थिक दंड लगाया जा रहा है। इसके अलावा बीएस-6, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों पर लगाए जा रहे ग्रीन टैक्स को समाप्त करने की मांग करते हुए कहा गया कि पर्यावरण अनुकूल वाहनों को प्रोत्साहित करने के बजाय उन पर अतिरिक्त वित्तीय भार डाला जा रहा है। एसोसिएशन ने परिवहन विभाग और ट्रांसपोर्ट संगठनों के बीच नियमित संवाद, विशेष शिविर और जनसुनवाई आयोजित करने की भी मांग की है ताकि व्यावहारिक समस्याओं का समय पर समाधान हो सके।
आंदोलन की तैयारी, सरकार के फैसले पर निगाहें
भीलवाड़ा से उठी यह आवाज अब प्रदेश के अन्य ट्रांसपोर्ट संगठनों तक पहुंच चुकी है। एसोसिएशन का दावा है कि यदि सात दिन में सरकार ने सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन पूरे राजस्थान में फैलाया जाएगा। ऐसे में अब निगाहें सरकार की अगली पहल पर टिकी हैं। यदि समय रहते संवाद और समाधान का रास्ता नहीं निकला तो इसका असर केवल ट्रांसपोर्ट व्यवसाय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि माल ढुलाई, व्यापार और आम जनजीवन पर भी पड़ सकता है।
ज्ञापन में यह रखी प्रमुख मांगे
परिवहन व्यवसाय से जुड़े परमिट, फिटनेस और अन्य अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए। छोटी तकनीकी या दस्तावेजी त्रुटियों पर लगाए जा रहे भारी जुर्मानों और दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। व्यावसायिक वाहनों में वीटीएलडी-जीपीएस की अनिवार्यता समाप्त की जाए अथवा इसे स्वैच्छिक बनाया जाए तथा इसकी लागत नियंत्रित की जाए। सेवा प्रदाता कंपनियों की मनमानी वसूली पर रोक लगाकर शुल्क सरकार द्वारा निर्धारित किए जाएं। प्रदेश में फिटनेस सेंटरों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि वाहन मालिकों को दूर-दराज के जिलों में नहीं जाना पड़े। ई-चालान व्यवस्था और जुर्माना नीति को व्यावहारिक एवं तर्कसंगत बनाया जाए। बीएस-6, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों पर लगाया जा रहा ग्रीन टैक्स समाप्त किया जाए। ट्रांसपोर्टरों की समस्याओं के समाधान के लिए नियमित जनसुनवाई, विशेष शिविर और विभागीय समन्वय बैठकें आयोजित की जाएं।
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