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भीलवाड़ा लोकजीवन। बनेड़ा क्षेत्र के खातन खेड़ी स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षा विभाग की उदासीनता और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ ग्रामीणों और छात्र-छात्राओं का गुस्सा फूट पड़ा। विद्यालय की चरमराई व्यवस्थाओं, जर्जर भवन और शिक्षकों की भारी कमी से आक्रोशित ग्रामीणों व विद्यार्थियों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर उग्र विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। आंदोलनकारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक स्कूल का ताला नहीं खोला जाएगा। विद्यालय में शिक्षा की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ कक्षा 1 से 12वीं तक करीब 500 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन उनके बैठने के लिए मात्र 5 कमरे ही उपलब्ध हैं। इनमें से भी अधिकांश कमरों की स्थिति अत्यंत जर्जर हो चुकी है, जिससे यहाँ हर समय किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। वर्तमान में बरसात के मौसम के दौरान इन सीलनभरे और टपकते जर्जर कमरों में बैठकर पढ़ाई करना मासूम बच्चों और शिक्षकों दोनों के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने रोष जताते हुए बताया कि विद्यालय के नए भवन के निर्माण के लिए दो वर्ष पूर्व ही बजट व प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। इसके बावजूद आज तक निर्माण कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो सका है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारी केवल खोखले आश्वासन देकर मामले को टाल रहे हैं, जबकि जमीन पर कोई काम दिखाई नहीं दे रहा है। भवन की विकट समस्या के साथ-साथ यह विद्यालय लंबे समय से स्टाफ की कमी से भी जूझ रहा है। 500 विद्यार्थियों के बड़े नामांकन पर यहाँ महज 5 शिक्षक (4 पुरुष और 1 महिला शिक्षक) ही कार्यरत हैं। ऐसे में विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई पूरी तरह ठप पड़ी है और समय पर पाठ्यक्रम पूरा होना नामुमकिन नजर आ रहा है।आंदोलन कर रहे छात्रों और ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि स्वीकृत नए विद्यालय भवन का निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से शुरू करवाया जाए। जब तक नया भवन नहीं बनता, तब तक जर्जर कमरों के स्थान पर बच्चों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक बैठक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए और विद्यालय में रिक्त पड़े शिक्षकों के पदों को शीघ्र भरा जाए। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के भविष्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यदि प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर लिखित में ठोस आश्वासन और कार्य शुरू करने की समय-सीमा तय नहीं की, तो यह अनिश्चितकालीन तालाबंदी और आंदोलन उग्र रूप अख्तियार करेगा। फिलहाल, समूचे क्षेत्र की नजरें अब प्रशासन के अगले रुख पर टिकी हुई हैं।
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