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भीलवाड़ा लोकजीवन। जिले के अंटाली तहसील के ग्राम दूल्हेपुरा में सरकारी तंत्र और रसूखदारों की मिलीभगत का एक बड़ा मामला गरमाता जा रहा है, जहां तालाब क्षेत्र के भीतर स्थित बेशकीमती गेमूं आबादी की राजकीय भूमि (खसरा संख्या 459/2) और ग्रामीणों के वर्षों पुराने सार्वजनिक रास्ते व नाले पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है। इस पूरे मामले को लेकर समस्त ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और उन्होंने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्कालीन ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) भंवर सिंह चारण और ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) ललित कोठारी पर गंभीर लापरवाही बरतने और आरोपियों को संरक्षण देने के लिए तथ्य-विपरीत व भ्रामक रिपोर्ट तैयार करने का संगीन आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस सरकारी भूमि और रास्ते का उपयोग गांव के लगभग 25 खातेदार वर्षों से आवागमन के लिए करते आ रहे हैं, जिस पर बीते 15 जून 2026 को आरोपियों द्वारा जबरन तारबंदी कर अवैध अतिक्रमण कर दिया गया और हौसले इतने बुलंद रहे कि 30 जून को वहां ईंटों की दीवार का अवैध निर्माण भी शुरू कर दिया गया। ग्रामीणों ने बताया कि जब 30 जून को दीवार का निर्माण किया जा रहा था, तब इसकी सूचना तत्कालीन बीडीओ भंवर सिंह चारण को फोन पर देकर निर्माण तत्काल रुकवाने का अनुरोध किया गया था और उसी दिन राजस्थान संपर्क पोर्टल पर भी रिमाइंडर डाला गया था, लेकिन इसके बावजूद अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर न तो निर्माण रुकवाया और न ही कोई कार्रवाई की, जिससे आरोपियों को अवैध निर्माण आगे बढ़ाने का खुला अवसर मिल गया। ग्रामीणों का आरोप है कि इस लापरवाही को छुपाने के लिए अधिकारियों ने जो जांच रिपोर्ट पेश की, वह पूरी तरह झूठ का पुलिंदा है; क्योंकि रिपोर्ट में 15 जून को हुए नए अतिक्रमण को बरसों पुराना कब्जा बता दिया गया और पूरे गांव की सहमति दिखाने के लिए केवल आरोपी पक्ष के दो रिश्तेदारों के दस्तखत करवा लिए गए, जबकि किसी भी निष्पक्ष ग्रामीण या प्रभावित खातेदार के बयान तक दर्ज नहीं किए गए। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में कागजों पर यह भी दावा कर दिया गया कि 7 जुलाई को रास्ता खुलवा दिया गया है, जबकि जमीनी हकीकत में आज भी वहां दीवार और तारबंदी ज्यों की त्यों मौजूद है। सरकारी अभिलेखों और प्रशासनिक विश्वसनीयता के साथ हुए इस खिलवाड़ को लेकर अब ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की किसी वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष व समयबद्ध जांच कराई जाए, 30 जून की फोन कॉल रिकॉर्डिंग और पोर्टल के साक्ष्यों को जांच में शामिल किया जाए और मिलीभगत करने वाले दोषी अधिकारियों सहित भूमाफियाओं के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर सरकारी रास्ते को मुक्त कराया जाए।
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