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प्रसूताओं की मौत का मामला: एमजीएच प्रशासन ने की जांच कमेटी गठित, पूर्व मंत्री रामलाल जाट ने की परिजनों को नौकरी देने की मांग
By Lokjeewan Daily - 11-07-2026

- मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल ने ली बैठक
- जांच के लिए जयपुर से आएंगे अधिकारी
भीलवाड़ा लोकजीवन। महात्मा गांधी चिकित्सालय में हाल ही में हुई पांच प्रसूताओं की मौत के मामले में अस्पताल के अधिकारियों में हडक़ंप मचा हुआ है। प्रबंधन ने अब पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए एक उच्च स्तरीय विशेष जांच समिति का गठन किया है, ताकि यदि किसी भी स्तर पर कोई चिकित्सकीय लापरवाही रही हो, तो उसकी सत्यता सामने आ सके। उधर पूर्व मंत्री रामलाल जाट ने भी इस तरह की घटनाओं के घटित होने के पीछे सरकार की कमी बताई है।  एमजीएच प्रशासन ने यह भी दावा किया है कि चिकित्सा प्रशासन की प्रारंभिक समीक्षा में प्रसूताओं की मौत अस्पताल में फैले किसी संक्रमण की वजह से नहीं हुई है, बल्कि मृत प्रसूताएं अलग-अलग गंभीर बीमारियों से पीडि़त थीं। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अरुण कुमार गौड़ के अनुसार, जिन प्रसूताओं की मृत्यु हुई है, उनके क्लिनिकल रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि वे अलग-अलग जटिल बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रसित थीं, न कि किसी एक कॉमन इन्फेक्शन से। हालांकि, रूटीन प्रक्रिया के तहत ऑपरेशन थिएटर की जांच में नॉन-परमिसिबल सैंपल्स मिलने पर एहतियात के तौर पर उस ओटी को पिछले 4 दिन से पूरी तरह बंद रखा गया है। वर्तमान में इसे दोबारा स्टरलाइज और फ्यूमिगेट किया जा रहा है। जब तक इस ओटी की नई सैंपलिंग रिपोर्ट पूरी तरह सुरक्षित (नेगेटिव) नहीं आ जाती, तब तक इसे दोबारा चालू नहीं किया जाएगा।
लापरवाही की जांच के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर्स की कमेटी
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भले ही मौतों का कारण संक्रमण नहीं है, फिर भी इलाज में किसी भी प्रकार की मानवीय या पक्रियात्मक लापरवाही की आशंका को खारिज करने के लिए विशेषज्ञों की टीम तैनात की गई है। इस उच्च स्तरीय जांच कमेटी में  माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ,  सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष,  एनेस्थीसियाविभागाध्यक्ष को शामिल किया गया है।
यह विशेष कमेटी प्रसूताओं के इलाज के एक-एक दस्तावेज, केस हिस्ट्री और उपलब्ध संसाधनों की गहनता से पड़ताल कर रही है।
इन्फेक्शन कंट्रोल प्रोटोकॉल में लापरवाही पर होगी कार्रवाई
चिकित्सा प्रशासन के अनुसार, अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू में नियमित अंतराल पर सैंपल्स लेना एक सतत प्रक्रिया है, जिससे मरीजों के लिए सुरक्षित माहौल बना रहे। अस्पताल में हाल ही में सभी विभागाध्यक्षों की एक आपात बैठक बुलाई गई है। अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि मरीजों और प्रसूताओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। इन्फेक्शन कंट्रोल प्रोटोकॉल की कड़ाई से पालना के लिखित निर्देश दिए गए हैं और यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।  
प्रिंसिपल ने ली बैठक, जयपुर से आएंगे जांच अधिकारी
प्रसुताओं की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए आरवीआरएस मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. पूजा गंगराड़े अस्पताल पहुंची और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरुण कुमार गौड़ सहित संबंधित अधिकारियों की बैठक ली। अपराह्न में जयपुर से अधिकारी भी इस मामले की जांच के लिए पहुंचेगे। उधर इन घटनाओं के बाद मातृ एवं शिशु इकाई में जिम्मेदार अधिकारियों में हडक़ंप मचा हुआ है।
पूर्व मंत्री रामलाल जाट ने जताई चिंता, भाजपा सरकार को कोसा
एमजीएच की मातृ एवं शिशु इकाई में 6 दिनों में 5 प्रसूताओं की मौत के बाद पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस देहात जिलाध्यक्ष रामलाल जाट ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि  जिस तरीके से आज भारतीय जनता पार्टी की सरकार, जो डबल इंजन की सरकार, उसमें ऐसी घटनाएं हैं—भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, जोधपुर, बीकानेर, कोटा—हर जगह यह चीज आ रही है। भीलवाड़ा में 6 दिन में 5 मौतें हुईं। ऑपरेशन थिएटर में जो संक्रमण है..वहां 60 से 70 डिलीवरी डेली हो रही है, ओटी के लिए जब रिपोर्ट आई हुई है, तो ऐसी चीजें क्यों कर रहे हैं? मैं  चिकित्सा मंत्री, मुख्यमंत्री को निवेदन करूंगा की ऐसी टीम भेजिए जिससे इन हॉस्पिटलों की दुर्दशा सही रहे।  सरकार मरने वालों के परिवारों को सरकारी नौकरी दे और दोबारा ऐसी घटनाएं नहीं घटें, इसके लिए कोई अच्छी व्यवस्था टेक्निकल लोगों को भेजकर की जाए।

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