It is recommended that you update your browser to the latest browser to view this page.

Please update to continue or install another browser.

Update Google Chrome

एमसीएच में प्रसूताओं की मौत का मामला: उच्च स्तरीय टीम जांच कर जयपुर रवाना, सर्जिकल सामान के लिए सैंपल
By Lokjeewan Daily - 13-07-2026

- रविवार रात 10 बजे तक ओटी में की गहन पड़ताल
- बयानों और ड्यूटी रोस्टर का किया मिलान
भीलवाड़ा लोकजीवन। महात्मा गांधी अस्पताल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में प्रसव के बाद एक के बाद एक प्रसूताओं की मौत के अत्यंत गंभीर मामले में जयपुर से आई उच्च स्तरीय जांच टीम ने भीलवाड़ा पहुंचकर रविवार रात 10 बजे तक पड़ताल की। रविवार को एमजी हॉस्पिटल पहुंची इस दो सदस्यीय विशेष टीम ने करीब 10 घंटे तक गायनिक ऑपरेशन थिएटर  में ही डेरा डाले रखा और मौतों के कारणों की गहन पड़ताल की। इस उच्च स्तरीय टीम में मातृ स्वास्थ्य के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. तरुण चौधरी और अजमेर मेडिकल कॉलेज की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संध्या चौधरी शामिल हैं। जांच के दौरान टीम ने पूरी तरह मीडिया से दूरी बनाए रखी।
बंद कमरे में हुई पूछताछ, रिकॉर्ड कब्जे में लिए
जांच टीम ने गायनिक वार्ड और ओटी में तैनात डॉक्टरों, रेजिडेंट्स और नर्सिंग स्टाफ से बंद कमरे में अलग-अलग लंबी पूछताछ की। इसके साथ ही ड्यूटी रोस्टर और मौके पर मौजूद स्टाफ के बयानों का आपस में मिलान किया गया। टीम ने पिछले दिनों हुए सभी ऑपरेशनों से जुड़े मेडिकल रिकॉर्ड्स, केस फाइलों और प्रसूताओं को दी गई दवाओं व एनेस्थीसिया के चार्ट्स को भी अपने कब्जे में ले लिया है।
संक्रमण और उपचार प्रक्रिया में चूक की आशंका पर फोकस
जांच दल ने पिछले कुछ दिनों में सिजेरियन डिलीवरी के दौरान इस्तेमाल की गई दवाओं और सर्जिकल सामान के बैच नंबर नोट किए हैं और उनके सैंपल भी गहन जांच के लिए कलेक्ट किए हैं। टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या सभी प्रसूताओं को एक ही बैच की दवाएं या इंजेक्शन दिए गए थे? प्राथमिक तौर पर इस पूरे मामले को ऑपरेशन थिएटर में किसी गंभीर संक्रमण (इन्फेक्शन) या चिकित्सा प्रक्रिया में रही चूक से जोडक़र देखा जा रहा है। जांच टीम ने मौत के हर संभावित पहलू को खंगाला है, जिसमें उपचार प्रक्रिया, दवा की गुणवत्ता, संक्रमण नियंत्रण, ऑपरेशन थिएटर की मौजूदा स्थिति, वेंटिलेशन और स्टरलाइजेशन  की प्रक्रिया तथा ऑपरेशन के बाद रिकवरी की निगरानी में हुई चूक आदि बिंदु मुख्य हैं। जांच दल अपनी विस्तृत रिपोर्ट जल्द ही राज्य सरकार को सौंपेगा, जिसके बाद इस पूरे मामले में बड़ी प्रशासनिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई होने की संभावना है।
राजस्थान में एक्सपर्ट टीम आज करेगी हाई-लेवल रिव्यू
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में 18 प्रसूताओं की मौत पर स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने मेडिकल लापरवाही से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों से अंतिम समय में गंभीर मरीज रेफर होने के कारण यह आंकड़े बढ़े हैं। सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर स्वास्थ्य निदेशालय से एक विशेषज्ञ टीम गठित कर जांच के लिए भेजी है। आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने से अब तक प्रदेश के पांच जिलों के सरकारी चिकित्सा संस्थानों में कुल 18 महिलाओं की मौत हो चुकी है, जिनमें से कई मौतें सिजेरियन डिलीवरी के बाद हुईं। स्थिति तब और चिंताजनक हो गई जब 5 जुलाई से 10 जुलाई के बीच महज पांच दिनों के भीतर भीलवाड़ा और बांसवाड़ा जिलों में 9 प्रसूताओं की जान चली गई। इसी के बाद सरकार तुरंत एक्शन में आई और मामले की जांच का दायरा बढ़ाते हुए दवाओं की गुणवत्ता की जांच भी शुरू कर दी गई है।
जयपुर में आज गाइनोकोलॉजिस्ट्स की बड़ी बैठक
सरकार की ओर से भेजी गई स्वास्थ्य निदेशालय की टीम भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में इलाज के रिकॉर्ड, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और डॉक्टरों व नर्सों के बयानों की समीक्षा कर रही है। इसी कड़ी में आज जयपुर में स्त्री रोग विशेषज्ञों की एक हाई-लेवल बैठक होने जा रही है। यह टीम हर एक मौत के तकनीकी कारणों की समीक्षा करेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।  

अन्य सम्बंधित खबरे