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एमजीएच में प्रसूताओं की मौत पर बोले चिकित्सा मंत्री, प्रत्येक मामले की होगी निष्पक्ष जांच
By Lokjeewan Daily - 15-07-2026

-  पीडि़त परिवारों में अपनों को खोने का गम
- मंत्री पहनते रहे मालाएं एवं मेवाड़ी पगड़ी  
भीलवाड़ा लोकजीवन। महात्मा गांधी चिकित्सालय में हाल ही में हुई प्रसूताओं की मौत के गंभीर मामले के बीच चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री  गजेन्द्र सिंह खींवसर का भीलवाड़ा दौरा व्यवस्थागत कमियों से ज्यादा वीआईपी संस्कृति को लेकर चर्चा में आ गया। एक तरफ जहां पीडि़त परिवारों में अपनों को खोने का गम और आक्रोश था, वहीं दूसरी तरफ मंत्री के आगमन पर सर्किट हाउस से लेकर अस्पताल के प्रवेश द्वार तक जगह-जगह उनका स्वागत सत्कार किया गया। हद तो तब हो गई जब अस्पताल प्रशासन ने  मंत्री के निरीक्षण से ठीक पहले पूरे अस्पताल परिसर में गुलाब जल का भारी छिडक़ाव करवाकर उसे महका दिया।
मंत्री ने किया सघन निरीक्षण, दिए निर्देश
इस वीआईपी तामझाम के बीच, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने महात्मा गांधी चिकित्सालय का सघन निरीक्षण कर चिकित्सकीय व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने मेडिकल आईसीयू, गायनिक ऑपरेशन थिएटर तथा अन्य संबंधित वार्डों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली तथा दिवंगत प्रसूताओं के नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
निरीक्षण के उपरांत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक मातृ मृत्यु को अत्यंत गंभीरता से लेती है। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए एक राज्य स्तरीय विशेष समिति का गठन किया गया है जो विस्तृत जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उसे सार्वजनिक किया जाएगा तथा यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल प्रशासन ने दी मौतों पर सफाई
बैठक में  खींवसर ने बताया कि अस्पताल के पीएमओ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार,  पांच महिलाओं में से एक महिला प्रसूता नहीं थी। वह बच्चेदानी के ऑपरेशन के लिए भर्ती हुई थीं तथा उनकी मृत्यु हृदयाघात  के कारण हुई। एक अन्य महिला का चिकित्सालय में कोई ऑपरेशन नहीं किया गया था; उन्हें गंभीर अवस्था में रेफर किया गया था, जहां उपचार के दौरान हाइपोवोलेमिक शॉक के कारण उनका निधन हुआ। शेष तीन प्रसूताओं की मृत्यु क्रमश: पल्मोनरी थ्रोम्बो एम्बोलिज्म, सिंड्रोम तथा प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्तस्राव एवं डीआईसी जैसी गंभीर चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण हुई। सभी सिजेरियन ऑपरेशन ऑपरेशन थिएटर 1 में किए गए थे, जहां किसी भी प्रकार के संंक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, ऑपरेशन थिएटर क्रमांक-2 को 30 जून 2026 से माइक्रोबायोलॉजिकल कल्चर पॉजिटिव आने के कारण बंद रखा गया था और उसमें कोई ऑपरेशन नहीं किया गया। वर्तमान में अस्पताल में 22 स्टरलाइज्ड ऑपरेशन सेट उपलब्ध हैं और प्रतिदिन औसतन 15 से 20 सिजेरियन ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं।
प्रदेशभर में 5 दिवसीय विशेष अभियान शुरू
मंत्री ने बताया कि प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से  5 दिवसीय विशेष अभियान के तहत सभी गर्भवती महिलाओं की निर्धारित स्वास्थ्य मानकों के अनुसार सघन स्क्रीनिंग की जाएगी।  बैठक में शाहपुरा विधायक लालाराम बैरवा, पूर्व विधायक वि_ल शंकर अवस्थी, जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा सहित मेडिकल कॉलेज जोधपुर के प्राचार्य डॉ. बी.एस. जोधा, कोटा मेडिकल कॉलेज की डॉ. निर्मला शर्मा, निदेशक एएसएच डॉ. मधु, परियोजना निदेशक (मातृ स्वास्थ्य) डॉ. तरुण चौधरी,  सीएमएचओ डॉ. संजीच शर्मा, मेडिकल कॉलेज   प्राचार्य पूजा गंगराड़े, एमजीएच चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरुण कुमार गौड़ उपस्थित रहे।

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