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जिलेभर के निजी शिक्षण संस्थान रहे बंद, संचालकों का कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन, बड़े आंदोलन की चेतावनी
By Lokjeewan Daily - 15-07-2026

- निजी स्कूलों की हड़ताल से थमी पढ़ाई
- सूचना के अभाव में स्कूल पहुंचे छात्र लौटे बैरंग
भीलवाड़ा लोकजीवन। आरटीई भुगतान, निरीक्षण व्यवस्था और निजी विद्यालयों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर जिलेभर के निजी स्कूल बुधवार को बंद रहे। निजी स्कूल एवं संघर्ष समिति के आह्वान पर हुए एक दिवसीय सांकेतिक बंद का असर शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक देखने को मिला। कई अभिभावकों और विद्यार्थियों को स्कूल बंद होने की जानकारी नहीं मिल सकी, जिसके चलते सुबह कुछ बच्चे स्कूल पहुंच गए। वहां ताले लगे मिलने पर उन्हें बैरंग लौटना पड़ा। बुधवार को निजी विद्यालय संचालकों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
गैर-सरकारी विद्यालयों के साथ भेदभाव
राज. प्राईवेट एज्युकेशन महासंघ अध्यक्ष पंकज प्रजापत ने बताया कि ज्ञापन में राज्य सरकार पर गैर-सरकारी विद्यालयों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए विभिन्न मांगों के शीघ्र समाधान की मांग की गई। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि आरटीई के तहत मिलने वाले भुगतान में लगातार देरी हो रही है, जिससे विद्यालयों के संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उनका आरोप है कि विभागीय स्तर पर ऐसे नियम और प्रक्रियाएं लागू की जा रही हैं, जिनसे निजी विद्यालयों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कोविड काल का भुगतान अब तक अटका
एसोसियेशन ऑफ प्राईवेट स्कूल, राजस्थान अध्यक्ष राजीव जैन ने बताया कि ज्ञापन में शिक्षा संबलन निरीक्षण व्यवस्था समाप्त करने, बिना नो-ड्यूज प्रमाण पत्र के टीसी जारी करने की बाध्यता खत्म करने, प्री-प्राइमरी कक्षाओं के आरटीई भुगतान का बकाया जारी करने तथा कोविड काल के लंबित भुगतानों का निस्तारण करने की मांग की गई है। इसके अलावा आरटीई के तहत यूनिट कॉस्ट में प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत वृद्धि तथा पाठ्यपुस्तकों की राशि सीधे अभिभावकों अथवा विद्यालय प्रबंधन के खातों में भेजने की मांग भी शामिल है।
10 दिनों में मांगों परनिर्णय नहीं तो आंदोलन उग्र
जिला निजी शिक्षण संस्थान अध्यक्ष अर्जुन देवलिया ने बताया कि  प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि आगामी 10 दिनों में उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए शिक्षा विभाग और राज्य सरकार जिम्मेदार होंगे। जिले में निजी स्कूल बंद रहने से हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई एक दिन के लिए प्रभावित रही। कई अभिभावक भी सुबह स्कूल पहुंचने के बाद ही बंद की जानकारी मिलने से असमंजस में नजर आए। हालांकि स्कूल संचालकों का कहना है कि यह आंदोलन विद्यार्थियों के हितों और शिक्षा व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

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