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भीलवाड़ा लोकजीवन। धर्मनगरीमें गुरुवार को आस्था, उमंग और भक्ति का ऐसा अनूठा संगम देखने को मिला कि पूरा शहर जय जगन्नाथ और हरे कृष्णा के महामंत्रों से गुंजायमान हो उठा। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के पावन अवसर पर ओडिशा के पुरीधाम की तर्ज पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की दो भव्य रथयात्राएं निकाली गईं। सुसज्जित रथों पर सवार होकर जब महाप्रभु नगर भ्रमण पर निकले, तो उनके दर्शनों के लिए सडक़ों पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। भक्तों ने पलक-पावड़े बिछाकर भगवान का स्वागत किया। इस दौरान हुई रिमझिम बारिश ने मौसम को बेहद सुहावना बना दिया, जिससे भक्तों का उत्साह और बढ़ गया। कावांखेड़ा स्थित प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से शाम ठीक 4 बजे भगवान जगन्नाथ की 24वीं रथयात्रा परंपरागत पूजा-अर्चना के बाद रवाना हुई। नक्काशीदार काष्ठ के भव्य रथ की डोर थामने और उसे खींचने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ मची रही। महिलाएं, पुरुष और बच्चे 'तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले' भजन पर थिरकते हुए रथ के आगे चल रहे थे। यह रथयात्रा शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होती हुई देर शाम पूज्य हरीशेवा धाम पहुंची। हरीशेवा धाम में भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी के घर विराजमान हुए हैं, जहां वे अगले 8 दिनों तक 25 जुलाई तक भक्तों को दर्शन देंगे। इसके बाद 25 जुलाई को महाप्रभु पुन: अपने निजधाम लौटेंगे।
बैलगाड़ी का सफर, अब काष्ठ रथ पर विराजे भगवान
कावांखेड़ा मंदिर के पुजारी पंडित प्रभुदयाल ने बताया कि इस रथयात्रा का इतिहास बेहद गौरवशाली और आस्था से भरा है। वर्ष 2003 में जब जयपुर से निर्मित संगमरमर की प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी, तब पहली रथयात्रा एक साधारण बैलगाड़ी से शुरू की गई थी। समय के साथ श्रद्धालुओं की संख्या और श्रद्धा बढ़ती चली गई। इसके बाद पुरीधाम से विशेष रूप से लकड़ी के विग्रह मंगवाए गए। वर्ष 2015 से उदयपुर में तैयार किए गए विशेष नक्काशीदार लकड़ी के भव्य रथ पर भगवान जगन्नाथ, बलदेव और देवी सुभद्रा नगर भ्रमण कर भक्तों को निहाल कर रहे हैं।
इस्कॉन की 10वीं रथयात्रा में कीर्तन पर झूमे श्रद्धालु
अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ की ओर से आयोजित 10वीं भव्य रथयात्रा शाम 5 बजे लक्ष्मीनारायण मंदिर से विधि-विधान से रवाना हुई। इस यात्रा का मुख्य आकर्षण संकीर्तन मंडलियां रहीं। रथयात्रा मुरली विलास रोड, रेलवे स्टेशन, गोलप्याऊ, बालाजी मार्केट, महावीर पार्क, कॉलेज रोड, गुरुद्वारा रोड और बडला चौराहा होते हुए अग्रसेन भवन पहुंची। पूरे रास्ते में मृदंग और झांझ-मंजीरों की थाप पर हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे... महामंत्र का संकीर्तन चलता रहा। भक्तों को झूमते देख मार्ग के दोनों ओर खड़े शहरवासी भी खुद को थिरकने से रोक नहीं पाए। यात्रा के स्वागत के लिए विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों द्वारा पूरे शहर में जगह-जगह तोरण द्वार सजाए गए थे। छतों और सडक़ों से भगवान पर पुष्पवर्षा की जा रही थी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह शीतल पेयजल और महाप्रसाद की विशेष व्यवस्था की गई थी। रथयात्रा के पूरे मार्ग में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे, वहीं स्वयंसेवक व्यवस्थाओं को संभालने में जुटे रहे। देर रात तक भीलवाड़ा पूरी तरह से जगन्नाथ स्वामी की भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया।
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