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नेशनल हाईवे पर अज्ञात वाहन ने लेपर्ड को कुचला, मौके पर ही तोड़ा दम
By Lokjeewan Daily - 20-07-2026

भीलवाड़ा लोकजीवन ।जिले के मांडलगढ़ क्षेत्र में रफ्तार के जुनून ने एक और बेजुबान वन्यजीव की जान ले ली। नेशनल हाईवे-27 पर मेनाल और लाडपुरा के बीच सडक़ पार कर रहे एक पैंथर (लेपर्ड) को अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने बेरहमी से कुचल दिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि लेपर्ड की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। सुबह जब राहगीरों ने हाईवे पर लहूलुहान अवस्था में लेपर्ड का शव देखा, तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया। वन्यजीवों के सुरक्षित गलियारों पर वाहनों की बेलगाम रफ्तार लगातार भारी पड़ रही है। क्षेत्रीय वन अधिकारी विमल रेगर ने बताया कि रविवार सुबह मांडलगढ़ वन विभाग को सूचना मिली थी कि हाईवे पर एक वन्यजीव मृत अवस्था में पड़ा है। सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम तुरंत घटनास्थल पर रवाना हुई।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यह घटना रविवार अलसुबह की है, जब लेपर्ड जंगल की ओर से सडक़ पार कर दूसरी तरफ जाने का प्रयास कर रहा था। इसी दौरान किसी अज्ञात भारी या तेज रफ्तार वाहन ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। लेपर्ड के सिर और मुंह पर गंभीर चोट के निशान मिले हैं, जिससे अत्यधिक खून बह जाने के कारण उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वन विभाग की टीम ने आवश्यक पंचनामा तैयार करने के बाद लेपर्ड के शव को मांडलगढ़ वन विभाग कार्यालय पहुंचाया। जहां पशु चिकित्सकों के मेडिकल बोर्ड द्वारा वन्यजीव का पोस्टमार्टम (पीएम) करवाया गया। पोस्टमार्टम के बाद वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के कड़े नियमों के तहत पूरे सम्मान और प्रशासनिक निगरानी में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। फिलहाल वन विभाग और स्थानीय पुलिस की टीम हाईवे पर लगे सीसीटीवी कैमरों और अन्य स्रोतों की मदद से टक्कर मारकर भागने वाले अज्ञात वाहन की पहचान और तलाश में जुटी हुई है। हाईवे पर वन्यजीवों की मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है। मेनाल और लाडपुरा का यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ है, जहां वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। वन विभाग और प्रशासन द्वारा बार-बार चेतावनी बोर्ड लगाने के बावजूद वाहन चालक गति सीमा का उल्लंघन करते हैं। यदि समय रहते इन संवेदनशील कॉरिडोर पर वाहनों की रफ्तार पर अंकुश लगाने के लिए स्पीड ब्रेकर या पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो क्षेत्र से वन्यजीवों का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा।

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