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सद्गुरु के वचनों का पालन ही आत्मकल्याण और सच्ची शांति का मार्ग - संत ओंकार सिंह
By Lokjeewan Daily - 28-07-2026

भीलवाड़ा लोकजीवन।  संत निरंकारी मिशन। द्वारा मानव कल्याण के तहत  सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज की असीम कृपा से  सिंधु नगर स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में आयोजित सत्संग में गुलाबपुरा से पधारे मुखी संत ओंकार सिंह ने श्रद्धालु भक्तों को आध्यात्मिक संदेश प्रदान करते हुए उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य सद्गुरु के वचनों को अपने जीवन में धारण कर ले, तो गुरु की महिमा उसके जीवन में स्वत: प्रकट होने लगती है। गुरु की आज्ञा का पालन करने से परमात्मा का स्मरण सहज हो जाता है तथा मन के विकार, अहंकार और बुराइयाँ धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।   सद्गुरु के उपदेशों का पालन ही सच्ची भक्ति का आधार है, जिससे मन निर्मल होता है और निरंकार से आत्मिक जुड़ाव स्थापित होता हैं। उन्होंने कहा कि गुरु का वचन ही सच्चा ज्ञान है और गुरु जिस परम सत्य का परिचय कराते हैं, वही निरंकार है। जो व्यक्ति गुरु के बताए मार्ग पर चलता है, वह स्वयं तो भवसागर से पार होता ही है, साथ ही अपने कुल का भी कल्याण करता है। ऐसे भक्त का सम्मान यमराज भी करते हैं। संत ओंकार सिंह ने कहा कि जो भक्त निरंकार की रज़ा में रहकर सतगुरु पर अटूट विश्वास बनाए रखता है, उसका जीवन सुख, शांति, संतोष और आध्यात्मिक आनंद से भर जाता है। उन्होंने  अवतार वाणी के वचनों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसा भक्त अंतत: देवलोक तुल्य आनंद को प्राप्त करता है और उसका जीवन धन्य हो जाता है। सत्संग के अंत में संगत को यही प्रेरणा दी गई कि गुरु के वचनों का पालन, निरंकार में अटूट आस्था और सतगुरु पर दृढ़ विश्वास ही आत्मकल्याण तथा जीवन की सच्ची शांति का मार्ग है।

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