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- कैंसर, हृदय और न्यूरो सर्जरी के मरीजों को भी मंजूरी के नाम पर इंतजार
- स्वर्णकार समाज शिक्षा प्रकोष्ठ ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को भेजा ज्ञापन
भीलवाड़ा लोकजीवन। राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों, उनके आश्रितों और पेंशनर्स को समय पर कैशलेस और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना है, लेकिन योजना के तहत उपचार कराने वाले मरीजों को इन दिनों रेफरल और स्वीकृति की लंबी प्रक्रिया से जूझना पड़ रहा है। गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज इलाज के बजाय अस्पतालों और आरजीएचएस की स्वीकृति प्रक्रिया के बीच चक्कर काटने को मजबूर हैं। स्वर्णकार समाज के प्रदेश शिक्षा प्रकोष्ठ सदस्य दिलीप सोनी ने मुख्यमंत्री, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य विभाग और आरजीएचएस निदेशक समेत संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भेजकर तत्काल समाधान की मांग की है। सोनी ने बताया कि गंभीर मरीजों को उपचार शुरू होने से पहले रेफरल, ऑनलाइन अप्रुवल और अन्य प्रशासनिक औपचारिकताओं से गुजरना पड़ता है। कई मामलों में मरीजों को भीलवाड़ा से जयपुर, जयपुर से उदयपुर या अन्य अस्पतालों तक लगातार रेफर किया जाता है। इससे मरीज और उनके परिजनों पर मानसिक, शारीरिक और आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। कैंसर, हृदय रोग, न्यूरो सर्जरी जैसी गंभीर बीमारियों में उपचार में होने वाली देरी मरीज के स्वास्थ्य के लिए भी जोखिम पैदा कर सकती है।
पैकेज मंजूरी के नाम पर बार-बार चक्कर का आरोप
सोनी ने आरोप लगाया कि कुछ निजी अस्पताल आरजीएचएस योजना को मरीजों के इलाज की सुविधा के बजाय आर्थिक लाभ का माध्यम बना रहे हैं। पैकेज स्वीकृति, अतिरिक्त जांच, पुन: रेफरल और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर मरीजों को बार-बार परेशान किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे उपचार की निरंतरता प्रभावित होती है और मरीज समय पर इलाज से वंचित रह सकता है। उन्होंने कहा कि योजना में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन जरूरी है, लेकिन गंभीर रोगियों के मामलों में स्वीकृति प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध किया जाना चाहिए। मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल और प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच भटकने की स्थिति नहीं बननी चाहिए।
गंभीर मरीजों के लिए फास्ट ट्रैक अप्रुवल की मांग
ज्ञापन में कैंसर, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों के लिए आरजीएचएस पैकेज की त्वरित और समयबद्ध स्वीकृति व्यवस्था लागू करने, फास्ट ट्रैक अप्रूवल सिस्टम शुरू करने तथा निजी अस्पतालों द्वारा अनावश्यक रेफरल और उपचार में देरी की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। दोषी पाए जाने वाले अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई के साथ लाभार्थियों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रभावी हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने का सुझाव दिया गया है। सोनी ने कहा कि आरजीएचएस की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए तो यह योजना सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके आश्रितों के लिए वास्तव में भरोसेमंद स्वास्थ्य सुरक्षा कवच साबित हो सकती है।
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