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सत्संग रूपी मां सभी को अपने आंचलमें समेट लेती है - निरंकारी संत विजय
By Lokjeewan Daily - 03-08-2026

भीलवाड़ा लोकजीवन। संत निरंकारी मिशन, भीलवाड़ा द्वारा सद्गुरु माता सुदीक्षा की अपार कृपा से आयोजित विशाल संत समागम में दिल्ली के संत विजय बत्रा ने  अग्रवाल भवन पथिक नगर में सैकड़ों भक्त श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सत्संग रूपी माँ सभी को अपने स्नेहिल आंचल में समेट लेती है। गुरु और भक्त का संबंध संसार का सबसे श्रेष्ठ संबंध है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज समस्त मानवता को ब्रह्मज्ञान प्रदान कर रहे हैं। परमात्मा प्रत्येक जीव के अंग-संग विद्यमान है, लेकिन सद्गुरु की कृपा से जब उसका अनुभव होता है, तभी वास्तविक ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति होती है।
संत विजय बत्रा ने कहा कि संगत की महिमा अपार है। यदि हम सद्गुरु के बताए मार्ग पर चलकर जीवन व्यतीत करें, तो सद्गुरु स्वयं हमारे जीवन का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से सुख-दु:ख की प्रत्येक घड़ी में परमात्मा का स्मरण और निरंतर अरदास करते रहने का संदेश दिया।उन्होंने कहा कि जो महात्मा सद्गुरु के वचनों को सत्य वचन मानकर अपने जीवन में धारण करता है, वही वास्तविक भक्ति का अधिकारी बनता है।     हमें अपने जीवन की प्रत्येक संवास सद्गुरु के चरणों में समर्पित करते हुए उनके बताए मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। जब जीवन पूर्ण समर्पण, विश्वास और आज्ञापालन से जुड़ जाता है, तब परमात्मा की कृपा और सद्गुरु का आशीर्वाद स्वत: प्राप्त होता है। इस अवसर पर अनेक भक्त श्रद्धालुओं ने गीत, कविता, विचार, एवं कवि के रूप में अपने विचार सांझा किया।  संत समागम के मध्य दिल्ली से पधारे संत विजय बत्रा का मेवाड़ी पगड़ी पहनाकर  स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। समागम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर सद्गुरु के प्रेरणादायी विचारों का लाभ प्राप्त किया।

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