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रामधाम में गूंजे जय श्रीराम के जयकारे, गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर उमड़ा आस्था का सैलाब
By Lokjeewan Daily - 19-08-2026

- नित्य गीता प्रवचन से बह रही ज्ञान व भक्ति की अविरल धारा
- संतों ने कहा बिना सत्संग नहीं संभव राम पद में दृढ़ अनुराग
भीलवाड़ा( चित्तौड़ रोड स्थित रामधाम आश्रम में बुधवार को श्री रामधाम रामायण मंडल ट्रस्ट के तत्वावधान में भक्तशिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज की पावन जयंती अत्यंत हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाई गई। श्रावण शुक्ल सप्तमी के इस अवसर पर दिव्य संत-सत्संग का आयोजन हुआ, जिसमें शहरभर के सैकड़ों धर्मप्रेमियों ने शिरकत कर पुण्य लाभ कमाया। इस पावन अवसर पर चारों दिशाओं से पधारे उच्च कोटि के संतों का सानिध्य श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। मंच पर विराजमान पूज्य संतों ने अपने-अपने विचारों व आध्यात्मिक व्याख्याओं से उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। स्वामी आनंदस्वरूप जी सरस्वती (शिव पुर ने अपने ओजस्वी वचनों में कलयुग में नाम-जप और सत्संग की महिमा पर बल दिया। उन्होंने बताया कि तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के माध्यम से जो भक्ति का सुलभ मार्ग दिखाया है, वह आज के व्यस्त जीवन में मानसिक शांति और ईश्वर प्राप्ति का स
बसे सहज साधन है।  स्वामी हरितीर्थ जी महाराज शंकर मठ, आबू पर्वत ने मानस की प्रसिद्ध चौपाई "बिनु सत्संग न हरि कथा, तेहि बिनु मोह न भाग। मोह गएँ बिनु राम पद, होइ न दृढ़ अनुराग॥" की मर्मस्पर्शी व्याख्या की। उन्होंने समझाया कि बिना सत्संग के हरि कथा नहीं मिलती और बिना कथा के अज्ञान व मोह का नाश संभव नहीं है। जब तक मन से मोह दूर नहीं होता, तब तक भगवान श्रीराम के चरणों में सच्चा अनुराग पैदा नहीं हो सकता। महंत मोहन शरण निंबार्क आश्रम, गांधी नगर ने तुलसीदास जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रामचरितमानस केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन जीने की एक आदर्श आचार संहिता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को तुलसीदास जी के दिखाए भक्ति पथ पर चलने का संकल्प दिलाया। महंत श्री संत दास जी महाराज हाथी भाटा धाम  ने संतों के संग और भक्ति के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि महापुरुषों का सानिध्य मनुष्य के कुविचारों को नष्ट कर उसमें सात्विकता का संचार करता है।  रामधाम ट्रस्ट के अध्यक्ष सूर्यप्रकाश मानसिंहका व उपाध्यक्ष हेमंत मानसिंहका ने सभी व्यवस्थाओं का संचालन किया और भीलवाड़ा वासियों से चातुर्मास के दौरान नित्य प्रवचन का लाभ उठाने का आह्वान किया। प्रवक्ता गोविंद सोडानी ने बताया कि सत्संग के समापन पर संतों की महाआरती उतारी गई और महाप्रसाद का वितरण हुआ। इस दौरान पूरा आश्रम परिसर जय श्रीराम और द्भामधाम सरकार की जय के उद्घोष से गुंजायमान रहा।

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