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बेटियां ससुराल को स्वर्ग बना ले तीर्थ पर जाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी-आचार्य पुलकसागर
By Lokjeewan Daily - 21-08-2026

- चित्रकूटधाम में ज्ञान गंगा महोत्सव जारी
-पुलक वाणी सुनने उमड़ रहे शहरवासी
भीलवाड़ा। लडक़ा एक जिंदगी में एक जीवन जाता है पर लड़किया एक जिंदगी में दो जीवन जीती है। एक जीवन मायके में ओर दूसरा जीवन ससुराल में जीती है। जो बेटियां ससुराल में मायके के अंदाज में जीती है उनका जीवन बिगड़ जाता है। बेटियां अपने ससुराल को सुंदर बना उसे स्वर्ग बनाने की ठान ले तो वह तीर्थ बन जाएगा ओर उन्हें सम्मेदशिखर या वैेष्णवदेवी जैसे तीर्थ पर जाने की जरूरत ही नहीं रहेगी। ये विचार भीलवा?ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में शुक्रवार को परिवार में बेटियों के महत्व पर प्रवचन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बेटियों को ससुराल को स्वर्ग बनाना है तो अहंकार कम करना होगा ओर मां बाप को उस सोच  का त्याग करना होगा जिसमें बेटियों से कहां जाता है कि ससुराल में किसी से डरना या दबना मत। इस सोच से बेटियों का घर उजड़ रहा है ओर ऐसा होने पर माता पिता भी चैन से नहीं रह पाएंगे। उन्हें समझाएं कि शादी के बाद अब वहीं उनका घर है। विवाहित बेटियां भी ध्यान रखे कि ससुराल की समस्याओं का रोना मायके में रोने पर इज्जत कम होगी ओर मान सम्मान बनाए रखना है तो वहां की समस्याओं का समाधान वहीं ढूंढना पड़ेगा। बेटियां समस्याओं को अपनी ताकत बनाना सीख जाए। आचार्यश्री ने कहा कि जिस संस्कृति में ये कहा जाता है कि बेटी की डोली पीहर से ओर अर्थी ससुराल से उठती है वहां उसे तलाक के लिए मत उकसाओ। जिसे सबमें खराबी नजर आए समझ लेना उसमें ही खराबी है। सास बहु एक दूसरे को पराई मानने की बजाय मां बेटी के समान प्यार करे ओर सास बहु को इतना प्यार दे कि वह मायके के मोबाइल नम्बर भूल जाए फिर घर स्वर्ग बनते देर नहीं लगेगी। उन्होंने कहा कि बेटियां ससुराल को अपना मानेगी तो ससुरालवाले भी उसे पलकों पर रखेंगे। शादी के बाद बेटियों का सम्मान मायके में नहीं ससुराल में होता है। जब तक पिता जिंदा होते है तभी तक बेटियों के लिए मायका होता है उनके जाने के बाद मां भी लाचार हो जाती है। इसलिए शादी के बाद मायके में लंबे समय तक बेटियों को नहीं रख उन्हें ससुराल जाने के लिए प्रेरित करे। आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि पैसे से अधिक महत्व संस्कारों का है ओर संस्कार हमारे आचरण,खानपान ओर जीवनशैली में दिखने चाहिए। हमारे बच्चों को सुविधाएं देने से अधिक जरूरी संस्कार देना है। बच्चों से लाड़ प्यार करो पर इतना मत करो कि उनका भविष्य बर्बाद हो जाए। जिनकी जवानी सुधर जाती है उनको बुढ़ापे में आंसू नहीं बहाने प?ते ओर जिनकी जवानी बिगाड़ ली तो बुढ़ापे में रोना ही पड़ेगा। प्रवचन के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन एवं आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य प्रेमचंद जम्बूकुमार ललित मनोज भैसा परिवार  परिवार ने प्राप्त किया। सौभाग्यशाली परिवार एवं अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह, सह संयोजक लोकेश अजमेरा एवं अन्य सदस्यों ने किया। आरके आरसी महिला मण्डल की सदस्यों ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया। ज्ञान की गंगा में डूबकी लगाने के लिए भीलवा?ा के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों लोग पहुंच रहे है। ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में प्रवचन होंगे। है। शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है जिसमें भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे है।

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