It is recommended that you update your browser to the latest browser to view this page.

Please update to continue or install another browser.

Update Google Chrome

दिल्ली-जयपुर से पहले कारोई दरबार में हाजिरी: टिकट की जंग अब ग्रह-नक्षत्रों के हवाले
By Lokjeewan Daily - 27-08-2026

- भोर होते ही किस्मत का ताला खुलवाने पहुंच रहे प्रत्याशी
- ज्योतिष नगरी कारोई में लग रहा चमचमाती गाडिय़ों का रेला
भीलवाड़ा। चुनावी बिगुल बजते ही सियासी हलकों की हवा बदल चुकी है। जो नेता कल तक पार्टी दफ्तरों के गलियारों में शक्ति प्रदर्शन कर रहे थे और आलाकमान की चौखट पर धोक लगा रहे थे, वे अब भोर होते ही अपनी किस्मत का ताला खुलवाने ज्योतिष नगरी कारोई का रुख कर रहे हैं। भीलवाड़ा का यह छोटा-सा कस्बा इन दिनों राजस्थान की राजनीति का सबसे बड़ा अनदेखा पॉवर सेंटर बन चुका है, जहां नेताओं की जीत-हार और राजनीतिक वजूद का फैसला जनता से पहले ग्रह-नक्षत्रों की चाल तय कर रही है।  कारोई की संकरी गलियों में इन दिनों धूल उड़ाती करोड़ों की चमचमाती लग्जरी गाडिय़ां और उनके भीतर पसरा भारी तनाव साफ देखा जा सकता है। करीब 50 से ज्यादा नामी ज्योतिषियों के आशियानों के बाहर प्रदेशभर से आए सियासी दिग्गजों का तांता लगा है। मंजर यह है कि दावेदार सिर्फ अपनी जन्मपत्री और हथेलियां ही नहीं, बल्कि अपने दशकों के सेवाकाल की फाइलें, आलानेताओं के साथ तस्वीरें और किए गए सामाजिक कार्यों के पुलिंदे लेकर पंडितों के सामने पेश हो रहे हैं।
कारोई के दरबार में गूंजते सवाल सीधे और तीखे
कारोई के दरबार में हाजिरी लगाते ही पहला सवाल यहीं है कि क्या आलाकमान का दिल पिघलेगा और टिकट मेरी झोली में आएगा? और अगर टिकट मिल भी गया, तो क्या सरपंच, प्रधान, पालिका अध्यक्ष या मेयर की कुर्सी तक पहुंचने का राजयोग कुंडली में दर्ज है?
नाड़ी ज्योतिष से लगा रहे नेताओं की दशा का हिसाब
स्थानीय ज्योतिषाचार्य पंडित गोपाललाल व्यास के अनुसार, इन दिनों भृगु संहिता और नाड़ी ज्योतिष के प्राचीन पन्नों को खंगालकर नेताओं की दशा और अंतर्दशा का हिसाब-किताब लगाया जा रहा है। पार्टियों के अंदरूनी सर्वे, गुप्त रिपोर्ट और धड़ेबाजी की खींचतान के बीच नेता किसी भी तरह का जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं। वे चुनावी अखाड़े में उतरने से पहले राहु, केतु और शनि के संभावित वार से बचने की काट तलाश रहे हैं। जमीन पर चाहे जनता का आशीर्वाद सबसे बड़ा पैमाना हो, लेकिन अनिश्चितता के इस सियासी भंवर में नेताओं का यह अटूट ज्योतिषीय भरोसा साबित करता है कि कुर्सी की भूख इंसानी कोशिशों से आगे बढक़र अब सितारों की मेहरबानी पर टिक चुकी है।

अन्य सम्बंधित खबरे