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भगवान को याद करेंगे तो आंसू मिट जाएंगे ओर संसार को याद करेंगे तो जन्मों जन्म रोते रहेंगे- आचार्य पुलकसागर
By Lokjeewan Daily - 02-09-2026

- आचार्य को सूर्यमहल में  दैनिक चातुर्मासिक प्रवचन जारी
- प्रवचन सुनने उमड़ रहे जैन सहित सर्वसमाज के लोग
भीलवाड़ा लोकजीवन। जैसी हमारी सोच होंगी वैसा ही हमारा जीवन बन जाएगा। सोच बदल लेंगे तो संसार बदल जाएगा। संत में ओर श्रावक में सोच का ही अंतर होता है। व्यक्ति की सोच ही उसके दु:ख का कारण होती है। भगवान के गुणों का स्मरण करेंगे तो आंसू मिट जाएंगे ओर संसार के गुणों का स्मरण करेंगे तो जन्मों जन्म तक रोते रहेंगे। जब सारी दुनिया को भूलते तो भगवान करीब लगता है ओर जब दुनिया समीप लगती है तो भगवान को भूल जाते है। ये विचार श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज ने शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में मंगलवार को चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि राग द्धेष करना व्यक्ति की भूल है ओर ओर मोह माया से व्यक्ति कभी सुखी नहीं हो सकता। आत्मा को वहीं जान पाएगा जो पुर्नजन्म में विश्वास रखता है। आत्मा कभी मरती नहीं है वह शुद्ध हो जाए तो सिद्धगति में जाकर जिंदा रहती है ओर अशुद्ध रहती है तो चार गति में जिंदा रहती है। आचार्यश्री ने कहा कि जीवन तप त्याग से ही संवरता है। उपवास इस अनुभूति के लिए कराया जाता है कि बिना भोजन पानी भी जिंदा रह सकते है। जब तक तप नहीं करेंगे इसकी अनुभूति नहीं हो पाएगी।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि हमे दूसरों को नहीं खुद को जानने की जरूरत है। आंखे सबको देखती पर खुद को नहीं देख पाती। आत्मा भी अपने स्वभाव में जिनेन्द्र भगवान को जाने बिना नहीं जा सकती। यदि जिनेन्द्र भगवान को जीवन से हटा देंगे तो मोक्ष, निर्जरा, कर्मबंध, संसार, श्रावक, चार गति आदि क्या होते ये कौन बताएगा। भगवान बनने के लिए आत्मा को तपाना प?ता है। उन्होंने कहा कि संत बनना कठिन नहीं पर इसके लिए माइंड सेट करना कठिन है। माइंट सेट हो गया तो चिंतन बदल जाएगा ओर चिंतन बदला तो हमे सृष्टि भी बदली हुई नजर आएगी। श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि शुरू में दीप प्रज्वलन,पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य सुशीलकुमार,प्रदीप, जंबू, अजीत गदिया परिवार ने प्राप्त किया। चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने बताया कि प्रतिदिन चातुर्मासिक प्रवचन सुबह 8.30 से 10 बजे तक सूर्यमहल में हो रहे है। शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है जिसमें भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे है।

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