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सदगुरू का ज्ञान जीवन को सही दिशा प्रदान करता है - निरंकारी संत हीरालाल
By Lokjeewan Daily - 02-09-2026

भीलवाड़ा लोकजीवन । सदगुरू माता सुदीक्षा  महाराज की अपार कृपा से बापू नगर स्थित खुले प्रांगण में उदयपुर से पधारे संत हीरालाल जी के सानिध्य में सत्संग का आयोजन हुआ। सत्संग में बड़ी संख्या में साध संगत ने भाग लेकर आध्यात्मिक विचारों का लाभ लिया। सत्संग को संबोधित करते हुए संत हीरालाल ने कहा कि सद्गुरु होता जग का दाता, जो चाहे कर सकता है। सत्संग की हर सीख सद्गुरु की देन है। सेवा, सत्संग, सुमिरन, ज्ञान और निरंकार की पहचान ही मानव जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग है। उन्होंने कहा कि यदि संत का मार्गदर्शन न मिले तो मनुष्य संसार के मोह-माया में भटकता रहता है और उसका जीवन व्यर्थ चला जाता है। उन्होंने कहा कि जब सद्गुरु का ज्ञान जीवन में आता है तो इंसान के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगता है। मनुष्य का मन उसे तरह-तरह के कार्य करवाता है, लेकिन जब मन की लगन ज्ञान से जुडक़र सद्गुरु को समर्पित हो जाती है तो जीवन सही दिशा में आगे बढ़ता है। सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज भी मानव मात्र को ज्ञान, प्रेम, सेवा और सद्भाव के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे रही हैं। जीवन में ज्ञान का आना सद्गुरु की अपार कृपा है। संत हीरालाल  ने ज्ञानवान व्यक्ति की तुलना चंदन के पेड़ से करते हुए कहा कि जिस प्रकार चंदन स्वयं सुगंधित होकर अपने आसपास के वातावरण को भी सुगंधित करता है, उसी प्रकार ज्ञानवान व्यक्ति अपने आचरण और व्यवहार से समाज में प्रेम, शांति और सद्भाव की सुगंध फैलाता है। उन्होंने कहा कि सत्संग में आने से मनुष्य को जीवन जीने का सलीका आता है। ज्ञान प्राप्त करने के बाद प्रत्येक व्यक्ति को आत्ममंथन करना चाहिए कि वह सद्गुरु की सिखलाई को अपने जीवन में कितना उतार रहा है। जन्म से लेकर मृत्यु तक हमें यह विचार करना चाहिए कि हमारा जीवन किस प्रकार बीता और हमने मानव जीवन का कितना सदुपयोग किया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन केवल धन कमाने, परिवार बढ़ाने या सुख-सुविधाएं जुटाने के लिए नहीं मिला है। मनुष्य को इस जीवन में परमपिता परमात्मा को पहचानने और उसके साथ अपना संबंध जोडऩे का अवसर मिला है। हम सभी एक ही परमात्मा की संतान हैं। परमात्मा ने मनुष्यों को अलग-अलग जाति, वेशभूषा या भेदभाव के साथ नहीं बनाया है। सद्गुरु की शरण में जाकर ही इस परमात्मा की पहचान संभव है। संत ने कहा कि परमात्मा को जानकर, मानकर और उसके अनुसार पूर्ण रूप से जीवन जीना ही वास्तविक मानव जीवन है। जब जीवन में प्रेम, प्रीत, प्यार, करुणा और भाईचारा आता है, तभी एक आदर्श मानव जीवन का निर्माण होता है। इसलिए सद्गुरु के आदेश और उपदेशों को अपने जीवन में अपनाकर मानवता की सेवा करनी चाहिए। सत्संग के दौरान भक्त श्रद्धालुओं ने गीत, कविता एवं विचारों के माध्यम से अपने भाव प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंत में संत जगपाल सिंह जी दिनेश त्रिवेदी जने सत्संग में उपस्थित समस्त साध संगत तथा उदयपुर से पधारे संत हीरालाल जी का आभार प्रकट किया।

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