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वायरल ने बच्चों को लिया चपेट में, एमजीएच में एक बेड पर चल रहा दो बच्चों का इलाज
By Lokjeewan Daily - 02-09-2026

- आउटडोर में बाल मरीजों का आंकड़ा 400 पार
- बच्चों का जनरल वार्ड फुल, परिजन परेशान
भीलवाड़ा लोकजीवन। मौसम के बदलते मिजाज और भादो माह में भी बारिश के नहीं होने से भीषण गर्मी और उमस ने आमजन का जीना मुहाल कर दिया है। इस बेरुखी का सबसे बुरा असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। जिले भर में वायरल बुखार, सर्दी-खांसी और डायरिया का प्रकोप तेजी से फैल रहा है, जिसके चलते महात्मा गांधी चिकित्सालय की मातृ एवं शिशु इकाई  में बीमार बच्चों की बाढ़ आ गई है। अस्पताल के आउटडोर में रोजाना सैकड़ों बच्चे पहुंच रहे हैं, जिससे ओपीडी और इनडोर दोनों जगह अव्यवस्था का माहौल है। आलम यह है कि अस्पताल का जनरल चिल्ड्रन वार्ड अपनी क्षमता से अधिक भर चुका है। एक-एक बेड पर दो-दो बच्चों का इलाज मजबूरी में किया जा रहा है।  बेड्स की कमी के कारण माताएं

अपने बीमार बच्चों को गोद में लेकर ड्रिप और इंजेक्शन लगवा रही हैं।
ओपीडी में कतारें, इनडोर में नो-रूम की स्थिति
एमसीएच यूनिट की ओपीडी में इन दिनों 500 करीब बच्चे परामर्श के लिए आ रहे हैं। इनमें से करीब 10 प्रतिशत बच्चों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें तुरंत भर्ती करने की नौबत आ रही है। भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या इतनी ज्यादा है कि क्षमता से अधिक बच्चे उपचाराधीन हैं।  पीआईसीयू  भी पूरी तरह फुल चल रहे हैं। नए आने वाले मरीजों को भर्ती करने के लिए जगह नहीं बची है, जिसके चलते स्वास्थ्य कर्मी और डॉक्टर्स भारी तनाव में काम कर रहे हैं।
पानी की कमी और उमस बनी बीमारी की वजह
 भादो के महीने में सामान्यत: बारिश होती है, जिससे तापमान गिरता है। लेकिन इस बार मानसून की बेरुखी और भीषण गर्मी के साथ उमस ने वायरल लोड बढ़ा दिया है। डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त और तेज बुखार के लक्षण बच्चों में आम हैं। दूषित पानी और खानपान में लापरवाही भी बीमारी को बढ़ावा दे रही है।
भीड़ से संक्रमण फैलने की चिंता
अस्पताल में भर्ती बच्चों के परिजन भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। वार्डों में भीड़भाड़ और भीषण गर्मी के कारण संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ गया है। माताओं को रात-भर जागकर बच्चों की देखभाल करनी पड़ रही है। उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द अतिरिक्त व्यवस्था करने और शहर में साफ-सफाई व फॉगिंग सुनिश्चित करने की मांग की है।
चिकित्सकों की सलाह
डॉक्टरों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को भीषण गर्मी में बाहर न निकलने दें। उन्हें उबालकर ठंडा किया हुआ पानी ही पिलाएं। बासी भोजन न दें और ओआरएस का घोल पिलाते रहें। यदि बच्चे को तेज बुखार, उल्टी या दस्त हो, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में दिखाएं और लापरवाही न बरतें।  

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