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नगर निगम चुनाव: रहते है वार्ड 11 में, नाम वार्ड 7 की वोटर लिस्ट में, वार्ड 49 की हेमंतिका का नाम 39 में दर्ज
By Lokjeewan Daily - 09-09-2026

- प्रशासनिक लापरवाही से मतदाता हो रहे है परेशान
- वार्डों के पुनरीक्षण प्रक्रिया पर उठ रहे है सवाल
- लोकेश सोनी-
भीलवाड़ा लोकजीवन। नगर निगम चुनाव के बीच मतदाता सूचियों में भारी गफलत और विसंगतियों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। वार्ड सीमाओं के परिसीमन के बावजूद मतदाताओं के नाम गलत वार्डों की सूचियों में दर्ज होने से मतदाताओं और चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों के बीच भ्रम व चिंता की स्थिति बनी हुई है। ताज़ा मामलों में  वार्ड नंबर 11 में निवास करने वाले ऊषा और प्रेमचंद
के परिवार का नाम वार्ड नंबर 7 की मतदाता सूची में दर्ज कर दिया गया है। इसी तरह की एक और गंभीर लापरवाही वार्ड नंबर 49 में भी देखने को मिली है, जहां की निवासी हेमंतिका का नाम वार्ड नंबर 39 की वोटर लिस्ट में शामिल पाया गया है। वर्षों से अपने-अपने वार्डों में रह रहे इन परिवारों और मतदाताओं के नाम अचानक दूसरे वार्डों की सूचियों में शिफ्ट हो जाने से स्थानीय लोग अचंभित हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि जब व्यक्ति का भौतिक निवास किसी एक वार्ड में है, तो उसका नाम कई वार्ड दूर की मतदाता सूची में कैसे दर्ज कर दिया गया?
परिसीमन और बीएलओ जांच प्रणाली पर उठे सवाल
इन विसंगतियों के लगातार उजागर होने के बाद अब निर्वाचन विभाग द्वारा मतदाता सूची तैयार करने और वार्डों के पुनरीक्षण के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आमजन का कहना है कि वोटर लिस्ट के संशोधन और परिसीमन के दौरान बीएलओ  स्तर पर की गई जांच में इस स्तर की चूकों को अनदेखा कैसे कर दिया गया?
चुनावी गणित पर पड़ सकता है बड़ा असर
नगर निगम चुनाव में हार-जीत का फैसला अक्सर बहुत कम अंतर से होता है। ऐसे में वार्ड सीमा, मतदाता सूची और मतदान केंद्रों को लेकर हुई यह प्रशासनिक गड़बड़ी प्रत्याशियों के चुनावी गणित और समीकरणों को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकती है।
अधिकारियों के सत्यापन से स्पष्ट होगी स्थिति
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए चुनावी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल निवास स्थान और मतदाता सूची के वार्ड में भिन्नता होने से मतदान अवैध नहीं हो जाता। हालांकि, वास्तविक स्थिति तकनीकी त्रुटि की वजह से है या बीएलओ मैपिंग का फेरबदल है, यह संबंधित मतदाता रिकॉर्ड और निर्वाचन अधिकारियों के भौतिक सत्यापन के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा।  

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