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-आरयूएचएस टीम ने किया एमजीएच का निरीक्षण
- जनता को बेहतर विशेषज्ञ सेवाएं मिलने की उम्मीद
भीलवाड़ा लोकजीवन। राजमाता विजयाराजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज से संबद्ध महात्मा गांधी चिकित्सालय में स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों की सीटों के नियमन एवं स्वीकृति को लेकर राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ टीम ने विस्तृत निरीक्षण किया। इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, शैक्षणिक संसाधनों और व्यवस्थाओं का जायजा लेना था, ताकि यहां नए पीजी पाठ्यक्रम शुरू करने तथा सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय से अंतिम अनुमोदनप्राप्त किया जा सके। निरीक्षण के दौरान आरयूएचएस टीम ने मेडिसिन विभाग का दौरा कर वहां मरीजों के इलाज, उपलब्ध संसाधनों और शैक्षणिक माहौल की गहन समीक्षा की। इस निरीक्षण दल में सीकर के प्रोफेसर डॉ. मुकेश वर्मा एवं अजमेर के प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार गोठवाल शामिल थे। विशेषज्ञों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर संतोष जताया। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व ऑर्थोपेडिक्स (अस्थि रोग) और पीडियाट्रिक्स (बाल रोग) विभागों का निरीक्षण पूरा हो चुका है। वहीं ईएनटी, एनाटॉमी, बायोकेमिस्ट्री, प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन, फिजियोलॉजी और फॉरेंसिक मेडिसिन विभागों में भी निरीक्षण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है।
इन कड़े मापदंडों पर होता है सीटों का निर्धारण
राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालयऔर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के मानकों के अनुसार किसी भी मेडिकल कॉलेज में पीजी सीटों की स्वीकृति के लिए कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। प्रत्येक विभाग में तय मानकों के अनुसार प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की उपलब्धता जरूरी है। अस्पताल में मरीजों की पर्याप्त आवक अनिवार्य है, ताकि रेजिडेंट डॉक्टरों को व्यावहारिक प्रशिक्षण मिल सके। संबंधित विभागों में आधुनिक जांच मशीनें, एडवांस ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू तथा आपातकालीन सेवाएं दुरुस्त होनी चाहिए। विद्यार्थियों के लिए अद्यतन मेडिकल जर्नल्स, डिजिटल लाइब्रेरी और रिसर्च लैब की सुविधा होना आवश्यक है।
कॉलेज और आमजन को मिलेगा यह बड़ा फायदा
चिकित्सालय प्रबंधन और कॉलेज प्रशासन का प्रयास है कि मानक मापदंडों को पूरा करते हुए अधिक से अधिक विभागों में पीजी की मान्यता हासिल की जा सके। पीजी सीटें स्वीकृत होने से अस्पताल को नए रेजिडेंट डॉक्टर मिलेंगे, जिससे 24 घंटे आपातकालीन व वार्ड सेवाएं सुदृढ़ होंगी। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए स्थानीय स्तर पर ही विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध होंगे। इससे मरीजों को जयपुर या उदयपुर भागने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उनके समय व पैसे की बचत होगी। मेडिकल कॉलेज में शैक्षणिक माहौल मजबूत होगा, जिससे भीलवाड़ा का नाम चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा।
निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही आरयूएचएस द्वारा आगामी स्वीकृति प्रदान किए जाने की पूरी संभावना है।
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