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जहाजपुर लोकजीवन। नगर पालिका चुनाव के नतीजों के बाद अब अध्यक्ष पद को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। निर्दलीय पार्षद के रूप में चुनाव जीतने वाली पूर्व पालिका अध्यक्ष कांता मीणा ने अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। उनके नामांकन के साथ ही पालिका की अगली अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। कांता मीणा पहले भी जहाजपुर नगर पालिका की अध्यक्ष रह चुकी हैं। इस बार उन्होंने पार्टी के टिकट पर नहीं, बल्कि निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरकर जीत हासिल की, और अब अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी पेश कर राजनीतिक समीकरणों के बीच अपनी मौजूदगी मजबूत कर दी है।
भाजपा के बहुमत के बीच निर्दलीय दावेदारी ने बढ़ाया रोमांच
जहाजपुर नगर पालिका के 25 वार्डों के चुनाव परिणाम में भाजपा ने स्पष्ट बढ़त बनाते हुए 15 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस 3 सीटों पर सिमट गई और 7 निर्दलीय पार्षद विजयी रहे। अध्यक्ष पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित होने के कारण अब भाजपा की महिला पार्षदों के साथ-साथ निर्दलीय महिला पार्षदों की भूमिका भी चर्चा में है। ऐसे में कांता मीणा का नामांकन अध्यक्ष पद की तस्वीर को और दिलचस्प बना रहा है। भाजपा के पास बहुमत होने के बावजूद अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव में व्यक्तिगत राजनीतिक समीकरण, पार्षदों की निष्ठा और संभावित समर्थन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
पूर्व अध्यक्ष का अनुभव बना चर्चा का केंद्र
कांता मीणा के पक्ष में सबसे बड़ा राजनीतिक पहलू उनका पूर्व पालिका अध्यक्ष के रूप में अनुभव माना जा रहा है। पालिका के कामकाज और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों की समझ रखने वाली कांता मीणा के अध्यक्ष पद के लिए मैदान में उतरने से मुकाबले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सवाल यह है कि क्या कांता मीणा अपनी निर्दलीय जीत के बाद अध्यक्ष पद तक पहुंचने के लिए जरूरी समर्थन जुटा पाएंगी? या भाजपा अपने बहुमत के दम पर अध्यक्ष पद पर अपनी महिला पार्षद को बैठाएगी? इन सवालों के जवाब अध्यक्ष चुनाव के दौरान ही सामने आएंगे। कांता मीणा के नामांकन ने साफ कर दिया है कि जहाजपुर पालिका की अध्यक्ष पद की कुर्सी का मुकाबला अब केवल संख्या का खेल नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति और पार्षदों के समर्थन का भी बड़ा इम्तिहान बनने जा रहा है।
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