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पूर्णिमा से 26 को शुरू होगा पितृ पक्ष, श्राद्ध के साथ होगा तर्पण महापर्व का आगाज
By Lokjeewan Daily - 17-09-2026

- 10 अक्टूबर को शनैश्चरी अमावस्या पर विदाई
- नगर व्यास ने साझा की तिथियों की सटीक गणना
भीलवाड़ा लोकजीवन। सनातन धर्म में पूर्वजों के प्रति आदर, श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का 16 दिवसीय सनातन महापर्व पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) इस बार 26 सितंबर 2026, शनिवार से शुरू होने जा रहा है। भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा से शुरू होने वाला यह पावन पक्ष 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को सर्वपितृ शनैश्चरी अमावस्या के साथ पूर्ण होगा। ज्योतिषविदों एवं धर्मशास्त्रियों के अनुसार इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए तर्पण, पिंडदान एवं ब्राह्मण भोजन का विशेष विधान रहेगा।
नगर व्यास पंडित राजेंद्र व्यास के अनुसार, इस वर्ष तिथियों की गणना और ग्रह-नक्षत्रों के योग के तहत श्राद्ध की तिथियां तय की गई हैं। 26 सितंबर को पूर्णिमा तिथि का श्राद्ध होगा, जिसके साथ ही 16 दिनों के तर्पण काल का विधिवत शुभारंभ हो जाएगा। इसके बाद आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक क्रमवार श्राद्ध कर्म संपन्न किए जाएंगे।
तिथियों का घट-बढ़त, अष्टमी का क्षय, मातृ नवमी 4 को
पंडित व्यास ने तिथियों का विस्तृत विवरण साझा करते हुए बताया कि इस वर्ष 30 सितंबर (बुधवार) को चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन किया जाएगा। वहीं, 3 अक्टूबर (शनिवार) को अष्टमी तिथि का क्षय रहेगा। सुहागिन महिलाओं व माताओं के निमित्त किया जाने वाला विशेष मातृ नवमी श्राद्ध 4 अक्टूबर (रविवार) को मनाया जाएगा। दुर्घटना, शस्त्र या अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए परिजनों का श्राद्ध 9 अक्टूबर (शुक्रवार) को चतुर्दशी तिथि पर किया जाएगा। अंत में 10 अक्टूबर (शनिवार) को सर्वपितृ शनैश्चरी अमावस्या के साथ पितृ पक्ष का समापन होगा।
श्राद्ध तिथियों का पूरा पंचांग कैलेंडर
26 सितंबर (शनिवार) पूर्णिमा श्राद्ध (श्राद्धारंभ - भाद्रपद शुक्ला पूर्णिमा), 27 सितंबर (रविवार) प्रतिपदा (एकम) श्राद्ध, 28 सितंबर (सोमवार) द्वितीया श्राद्ध, 29 सितंबर (मंगलवार) तृतीया श्राद्ध, 30 सितंबर (बुधवार) चतुर्थी एवं पंचमी श्राद्ध (संयुक्त), 01 अक्टूबर (गुरुवार) षष्ठी श्राद्ध, 02 अक्टूबर (शुक्रवार) सप्तमी श्राद्ध, 03 अक्टूबर (शनिवार) अष्टमी श्राद्ध (अष्टमी क्षय), 04 अक्टूबर (रविवार) नवमी श्राद्ध (मातृ नवमी), 05 अक्टूबर (सोमवार) दशमी श्राद्ध, 06 अक्टूबर (मंगलवार) एकादशी श्राद्ध, 07 अक्टूबर (बुधवार) द्वादशी श्राद्ध, 08 अक्टूबर (गुरुवार) त्रयोदशी श्राद्ध, 09 अक्टूबर (शुक्रवार) चतुर्दशी (शस्त्र व अकाल मृत्यु हतों का) श्राद्ध तथा 10 अक्टूबर (शनिवार): सर्वपितृ शनैश्चरी अमावस्या श्राद्ध (श्राद्ध पक्ष पूर्ण)।
सात्विक जीवनशैली और दान-पुण्य की सलाह
धर्मशास्त्रियों का कहना है कि श्राद्ध पक्ष में पितर अदृश्य रूप से अपने परिजनों के पास आते हैं और अन्न-जल ग्रहण कर आशीर्वाद देते हैं। इस अवधि के दौरान परिवार में सात्विक वातावरण बनाए रखना आवश्यक है। ज्योतिषाचार्यों ने सलाह दी है कि इन 16 दिनों में संयमित जीवनशैली अपनाएं, तामसिक भोजन से परहेज करें और पशु-पक्षियों (कौवे, गाय, कुत्ते) के लिए ग्रास निकालकर अधिक से अधिक दान-पुण्य करें।

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