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सच्चा तपस्वी वही, जो मन-वाणी और क्रोध को रखे वश में : संत हरी चैतन्य
By Lokjeewan Daily - 18-09-2026

भीलवाड़ा लोकजीवन। हमीरगढ़ रोड स्थित रामधाम विरक्त आश्रम में श्री रामधाम रामायण मंडल ट्रस्ट की ओर से आयोजित विशेष सत्संग कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को आबू पर्वत स्थित शंकर मठ के स्वामी संत श्री हरी चैतन्य दास महाराज का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ। सत्संग के दौरान स्वामी जी ने मानव जीवन की सार्थकता और संयम पर विशेष बल देते हुए कहा कि मनुष्य का जन्म केवल संसार में आने और जाने के लिए नहीं हुआ है, बल्कि जीवन का एक बड़ा और गहन उद्देश्य है। सत्संग के दौरान संत श्री ने श्लोक वाचो वेगं मनस: क्रोधवेगं हिंसावेगमुदरोपस्थवेगम्... के माध्यम से आत्म-नियंत्रण का मार्ग दर्शाते हुए कहा कि एक सच्चे संन्यासी व तपस्वी को अपने छह वेगों— वाणी, मन, क्रोध, हिंसा, उदर (क्षुधा) तथा उपस्थ (वासना) को सदैव अपने वश में रखना चाहिए। स्वामी जी ने समझाया कि जब मनुष्य इन छहों वेगों पर नियंत्रण कर लेता है, तब दूसरों द्वारा की गई निंदा भी उसके हृदय में कोई विकार या अशांति पैदा नहीं कर सकती।
कार्यक्रम में श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक का संदर्भ देते हुए श्रद्धालुओं को पवित्र विचारों, भक्ति और ईश्वर-चिंतन के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई। वहीं पारिवारिक दायित्वों पर बोलते हुए संत श्री ने योग्य उत्तराधिकारी चुनने की बात कही, जो परिवार और समाज का समान रूप से ख्याल रख सके। शुरुआत में ट्रस्ट के अध्यक्ष सूर्यप्रकाश मानसिंहका एवं सचिव अभिषेक अग्रवाल ने स्वामी जी का स्वागत किया। अंत में ट्रस्ट के प्रवक्ता गोविंद प्रसाद सोडाणी ने सभी का आभार जताया।

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