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सेवा बनी समर्पण की साधना, निरंकारी संत समागम में जागृति का संदेश
By Lokjeewan Daily - 21-09-2026

भीलवाड़ा लोकजीवन। विविधताओं से भरे समाज में मानवता और एकता का संदेश देने वाला 77वां वार्षिक निरंकारी संत समागम 23 से 26 अक्टूबर तक संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल, समालखा (हरियाणा) में आयोजित होगा। स्थानीय प्रभारी संत प्यारेसी लाल ने बताया कि समागम में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी की उपस्थिति में श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक प्रवचन एवं दर्शन का लाभ मिलेगा।  समागम का मुख्य विषय  जागृति रखा गया है। इसके माध्यम से श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, मानवता, प्रेम, सेवा और सद्भाव की भावना को जीवन में अपनाने का संदेश दिया जाएगा। सेवा कार्यों के शुभारंभ अवसर पर निरंकारी राजपिता रमित जी ने सेवा स्थल का उद्घाटन किया। इस दौरान मिशन की कार्यकारिणी समिति, केंद्रीय सेवादल के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सेवा में सहभागिता की।  संत निरंकारी मंडल की अध्यक्ष राजकुमारी ‘मामी जी’ एवं सचिव जोगिंदर सुखीजा ने पुष्पगुच्छ भेंट कर निरंकारी राजपिता रमित जी का अभिनंदन किया।
 समागम की सेवाओं के शुभारंभ अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए निरंकारी राजपिता रमित जी ने कहा कि सेवा, त्याग और समर्पण की भावना मानव जीवन को सार्थक बनाती है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन केवल स्वयं तक सीमित न रहकर दूसरों के सुख-दुख में सहभागी बनने के लिए है। सेवा में ‘मैं’ के स्थान पर ‘हम’ की भावना विकसित होने पर मानवता का वास्तविक अर्थ सामने आता है।  उन्होंने कहा कि ‘जागृति’ का अर्थ हर क्षण सजग और सचेत रहना तथा प्रभु-स्मरण से जुड़े रहना है। संत समागम धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र की सीमाओं से परे मानवता और एकता का संदेश देता है। भीलवाड़ा से भी श्रद्धालुओं में समागम को लेकर उत्साह है और सेवा के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

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