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चिकित्सक परिवार की मौत: एक पर पिता-पुत्र और दूसरी चिता पर मां-बेटी का दाह संस्कार
By Lokjeewan Daily - 23-09-2026

भीलवाड़ा लोकजीवन। बारां जिले के छबड़ा में अपने साले के बच्चे के जन्मदिन समारोह की खुशियां मनाकर वापस जयपुर लौटते समय मांडल उप जिला अस्पताल के प्रभारी डॉ. सुरेश गजराज और उनके परिवार के साथ एक भीषण सडक़ दुर्घटना घटित हो गई। बारां-अकलेरा नेशनल हाईवे पर कवाई-अटरू के बीच कार की एक तेज रफ्तार अनियंत्रित भारी वाहन  से जोरदार भिड़ंत हो गई, जिसमें पूरा परिवार हमेशा के लिए शांत हो गया। इस दर्दनाक हादसे में मांडल अस्पताल प्रभारी डॉ. सुरेश गजराज (42), उनकी डॉक्टर पत्नी शालिनी मौर्य (41), 11 वर्षीय पुत्र स्वपनिल और 4 वर्षीय पुत्री निलिशा का निधन हो गया था।
चिकित्सक दंपति और दोनों बच्चों का अंतिम संस्कार डॉ. सुरेश के पैतृक गंाव, झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ रूरल क्षेत्र स्थित ज्योति नगर श्मशान घाट में संपन्न हुआ। श्मशान घाट में दो चिताओं पर पूरे परिवार का दाह संस्कार किया गया—एक चिता पर पिता डॉ. सुरेश व पुत्र स्वपनिल और दूसरी चिता पर माता डॉ. शालिनी व पुत्री निलिशा को अंतिम विदाई दी गई।  
संभाग स्तरीय समारोह में मिला था विशेष सम्मान
मांडल उप जिला अस्पताल के प्रभारी के रूप में डॉ. सुरेश गजराज पिछले 4 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने अपने कार्यकाल में अस्पताल की व्यवस्थाओं और बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व सुधार किया। उनके उत्कृष्ट व्यवहार और निष्काम सेवाभाव का ही नतीजा था कि बीते स्वतंत्रता दिवस पर अजमेर में आयोजित संभाग स्तरीय समारोह में उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया था।
दम्पति ने महात्मा गांधी अस्पताल में भी दी थीं सेवाएं
डॉ. सुरेश गजराज और उनकी पत्नी डॉ. शालिनी मौर्य का भीलवाड़ा शहर से गहरा जुड़ाव रहा है। डॉ. सुरेश फिजिशियन थे, जबकि उनकी पत्नी डॉ. शालिनी मौर्य शिशु रोग विशेषज्ञ थीं। दोनों ने लगभग 1 साल तक भीलवाड़ा के

महात्मा गांधी अस्पताल  में सेवाएं दी थीं। कोविड-19 महामारी के कठिन दौर में डॉ. सुरेश को सुवाणा के आयुर्वेद अस्पताल में बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर का इंचार्ज भी बनाया गया था।
खुशियों के बीच हमेशा के लिए सो गया परिवार
डॉ. सुरेश का परिवार 19 सितंबर को छबड़ा (बारां) में अपने साले के बच्चे के जन्मदिन समारोह में शामिल होने गया था। दोनों बच्चे स्वपनिल और निलिशा अपने ननिहाल पक्ष के बच्चों के साथ खेलने-कूदने में मग्न थे और जमकर मस्ती की थी। मंगलवार सुबह पूरा परिवार खुशमिजाज माहौल में कार से जयपुर के लिए निकला था, लेकिन रास्ते में अनियंत्रित भारी वाहन की चपेट में आने से पूरा परिवार ताश के पत्तों की तरह बिखर गया।

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