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भीलवाड़ा लोकजीवन। शहर में सडक़ हादसों पर अंकुश लगाने और ब्लैक स्पॉट्स के स्थाई समाधान को लेकर जिला सडक़ सुरक्षा समिति की बैठकों में भले ही बड़े-बड़े दावे और निर्देश दिए जा रहे हों, लेकिन धरातल पर स्थितियां इसके ठीक विपरीत नजर आ रही हैं। चित्तौड़ रोड पर रेलवे फाटक से लेकर रामधाम तक दोनों ओर पूरी सर्विस लेन बरसों से अवैध अतिक्रमण की चपेट में है। मुख्य मार्ग के समानांतर सुगम यातायात के लिए बनाई गई यह सर्विस लेन अब निजी बसों, क्रेन, व्यावसायिक वाहनों की अवैध पार्किंग और खान-पान के केबिनों का स्थायी अड्डा बन चुकी है। हाल ही में जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधु की अध्यक्षता में आयोजित सडक़ सुरक्षा समिति की बैठक में शहर के ब्लैक स्पॉट्स को चिन्हित कर स्थायी समाधान करने, अवैध कट बंद करने और नो-पार्किंग जोन में खड़े वाहनों व अतिक्रमणकारियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद चित्तौड़ रोड पर रेलवे फाटक से रामधाम के बीच सर्विस रोड पर खुलेआम अतिक्रमण पसर रहा है और संबंधित जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।
सर्विस लेन बनी वर्कशॉप व क्रेन पार्किंग
चित्तौड़ रोड की सर्विस लेन पर भारी-भरकम क्रेन, क्रेन-ट्रक और व्यावसायिक वाहन कतारबद्ध खड़े रहते हैं। सडक़ के बड़े हिस्से पर वाहनों की अनधिकृत पार्किंग के कारण पैदल चलने वालों और दुपहिया चालकों के लिए जगह ही नहीं बचती। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यहां दिन-रात भारी मशीनरी और वाहन पार्क रहते हैं, जिससे हादसों का अंदेशा बना रहता है।
ट्रैवल्स बसों का बना हुआ है अवैध स्टैंड
रामधाम व रेलवे फाटक के पास सर्विस रोड पर निजी ट्रेवल्स की बड़ी-बड़ी बसें खड़ी की जा रही हैं। मुख्य सडक़ और सर्विस रोड के मुहाने पर बसें खड़ी होने से मोड़ पर दृश्यता शून्य हो जाती है। इसके अलावा बसों के पीछे से अचानक निकलने वाले दुपहिया वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं।
चाय-नाश्ते के केबिन और अस्थाई दुकानें
सर्विस लेन के मुहाने पर ही चाय-नाश्ते और फास्ट फूड के थड़े व केबिन सज चुके हैं। दुकानों के आगे बेतरतीब खड़े मोटरसाइकिल व चारपहिया वाहन पूरी रोड को जाम कर देते हैं। ग्राहक सडक़ पर ही कुर्सियां और स्टूल लगाकर बैठते हैं, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
कागजों में सिमटे 15 दिवसीय अभियान और निर्देश
बैठक में दीपावली से पूर्व शहर की सडक़ों पर पैच रिपेयर, रिफ्लेक्टर टेप लगाने और नगर निगम व परिवहन विभाग को 15 दिवसीय संयुक्त अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन चित्तौड़ रोड पर स्थिति को देखकर साफ है कि प्रशासनिक बैठकों के फैसले सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गए हैं।
आमजन परेशान, जिम्मेदार बेखबर
राहगीरों और वाहन चालकों का कहना है कि जब सर्विस लेन पर कब्जा हो जाता है, तो उन्हें मजबूरन तेज रफ्तार मुख्य मार्ग पर चलना पड़ता है। इससे छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर हादसे का रूप ले सकती है। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन तुरंत संज्ञान लेकर रामधाम से रेलवे फाटक तक सर्विस रोड को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराए।
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