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हाथी पर सवार होकर आ रहीं जगदम्बा, 11 से शुरू होगी देवी साधना, प्रतिमाओं की बिक्री शुरू
By Lokjeewan Daily - 06-10-2026

भीलवाड़ा लोकजीवन।  शहर में शारदीय नवरात्र महोत्सव को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। 11 अक्टूबर से शुरू हो रहे नौ दिवसीय शक्ति आराधना पर्व पर पूरा शहर देवी भक्ति के रंग में रंगा नजर आएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन हाथी पर हो रहा है, जिसे सुख, समृद्धि, शांति और जलवृष्टि का शुभ प्रतीक माना जाता है। वस्त्रनगरी में इस बार 100 से अधिक प्रमुख स्थानों पर भव्य पांडाल सजेंगे और प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। शहर की बड़ी पूजा समितियों में करीब 90 प्रतिशत प्रतिमाएं बनकर तैयार हो चुकी हैं। मूर्तिकार रामनरेश के अनुसार मूर्तियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कई प्रमुख स्थानों पर 10 से 15 फीट तक ऊंची मनमोहक प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं। पांडालों में आकर्षक सजावट, रोशनी, प्रवेश व निकास तथा सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। शाम ढलते ही डांडिया रास, गरबा और धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहेगी।
घट स्थापना का यह रहेगा शुभ मुहूर्त
पंडितों के अनुसार नवरात्र के प्रथम दिन सुबह 7.56 बजे से 10.51 बजे तक घट स्थापना का सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त रहेगा। इसके बाद दोपहर 11.56 से 12.41 बजे तक अभिजित मुहूर्त में भी श्रद्धालु घरों और देवालयों में कलश स्थापना कर साधना का संकल्प ले सकेंगे। इस बार तिथियों की गणना के अनुसार 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी का अनोखा संयोग बन रहा है। महाअष्टमी सुबह 10:51 बजे तक रहेगी, जिसके तुरंत बाद महानवमी तिथि शुरू होगी। इस कारण हवन, कन्या पूजन व अन्य धार्मिक आयोजन 19 अक्टूबर को ही होंगे, जबकि 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा।
150 इको-फ्रेंडली प्रतिमाएं, पर्यावरण संरक्षण का संदेश
श्री गणेश उत्सव प्रबंध एवं सेवा समिति की ओर से पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए 5 फीट की 150 इको-फ्रेंडली दुर्गा प्रतिमाएं तैयार कराई गई हैं। मीडिया प्रभारी महावीर समदानी के अनुसार इनमें से 50 प्रतिमाएं शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थापित होंगी, जहां गरबा-डांडिया का आयोजन होगा। बाकी 100 प्रतिमाएं भीलवाड़ा ग्रामीण क्षेत्र, पड़ोसी जिलों व मध्य प्रदेश के मनासा व नीमच सहित अन्य स्थानों पर भेजी जाएंगी। प्रतिमाओं के लिए 8 अक्टूबर तक पंजीयन किया जाएगा। महोत्सव के बाद 19 और 20 अक्टूबर को इन प्रतिमाओं का निर्धारित जलाशयों में पर्यावरण-अनुकूल तरीके से विसर्जन किया जाएगा।

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