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शारदीय नवरात्रि का चौथे दिन हुई मां कूष्मांडा की पूजा, शक्तिपीठों में उमड़े भक्त
By Lokjeewan Daily - 14-10-2026

भीलवाड़ा लोकजीवन। शारदीय नवरात्रि के  चौथे दिन भगवती के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। शहर समेत जिलेभर के शक्तिपीठों में मातारानी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। शहर व गांवों से कई लोग समूह के रूप में हाथों में ध्वज लिए मातारानी के दरबार में पैदल पहुंचे और मत्था टेककर मनोकामना पूर्ति की कामना की। शहर में रोडवेज बस स्टैंड स्थित शक्तिधाम, पुलिस लाइन के पीछे बाबाधाम, हरणी स्थित मां चामुंडा के दरबार में आरती के समय बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। नवरात्र के चलते इन शक्तिपीठों में मातारानी का नियमित भव्य श्रृंगार भी किया जा रहा है।  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा की मंद मुस्कान से ही ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए इन्हें सृष्टि की आदिशक्ति कहा जाता है। इनकी आराधना से साधक को यश, बल और आरोग्य की प्राप्ति होती है। मां कूष्मांडा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और अलौकिक है। अष्टभुजाधारी देवी के हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जपमाला सुशोभित हैं तथा इनका वाहन सिंह है।
पूजन विधि: साधक प्रात: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मां दुर्गा के समक्ष व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र कर मां कूष्मांडा की प्रतिमा स्थापित करें। देवी को लाल या पीले पुष्प, रोली, अक्षत, चंदन, धूप व दीप अर्पित करें। मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग अत्यंत प्रिय है। इसके साथ ही फल, मिश्री व सात्विक प्रसाद अर्पित किया जा सकता है। पूजा के दौरान ?देवी कूष्माण्डायै नम:मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें तथा दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। मां कूष्मांडा की भक्ति मानव जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और मानसिक बल का संचार करती है। श्रद्धाभाव से की गई यह पूजा परिवार में सुख-समृद्धि और आरोग्य का आधार बनती है।

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