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भीलवाड़ा। करेड़ा थाना क्षेत्र में 18 अगस्त 2024 को बुद्धा गुर्जर की संदिग्ध मौत को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सजना का बाडिय़ा गांव के ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर करेड़ा थानाधिकारी पर हत्या के आरोपियों से मिलीभगत करने और गवाहों को धमकाने का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने थानाधिकारी को तत्काल हटाने और मामले की उच्च स्तरीय जाँच की मांग की है।
18 अगस्त 2024 को गांव के बुद्धा गुर्जर की संदिग्ध हालत में मौत हुई थी। परिजन इसे हार्ट अटैक बता रहे थे, लेकिन गांव वालों ने शव से कपड़ा हटाने पर गले में फंदे के निशान देखे। ग्रामीणों ने फोटो और वीडियो भी बनाए। इसके बाद मृतक की पत्नी पूजा गुर्जर और ग्रामीणों ने इसे हत्या/आत्महत्या की आशंका बताते हुए जाँच की मांग की। परिजनों और ग्रामीणों ने 2 सितंबर, 22 सितंबर और 17 अक्टूबर 2024 को थाने और पुलिस अधीक्षक को रिपोर्ट दी, लेकिन किसी भी रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जाँच, बयान या मुकदमा—कुछ भी दर्ज नहीं किया गया। 5 नवंबर को मृतक की पत्नी पूजा गुर्जर ने फिर एसपी भीलवाड़ा को शिकायत दी। मामले की गंभीरता देखते हुए एसपी ने तुरंत मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए, जिसके बाद 8 नवंबर को प्रकरण संख्या 223/2024 दर्ज हुआ। मुकदमा दर्ज होने के बाद पहली बार गवाहों को थाने बुलाया गया। गवाहों का आरोप है कि थानाधिकारी ने बयान के दौरान उन पर राजीनामा का दबाव बनाया और हत्या की दिशा में जाँच न करने के संकेत दिए। गवाहों द्वारा निष्पक्ष जाँच की मांग पर थानाधिकारी नाराज हो गए। गवाहों के आरोप के अनुसार, थानाधिकारी ने गवाह भैरू, तेजु और जगदीश को धमकाया, "तुझे गवाही देना सिखाता हूँ।" इसके बाद पुलिसकर्मियों को आदेश दिया कि उनके कपड़े उतरवाकर बैरक में डाल दें। जबकि उस समय उनके खिलाफ किसी प्रकार की शिकायत दर्ज नहीं थी। गवाहों ने थाने में हुई मारपीट की रिपोर्ट दी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद थानाधिकारी ने हत्या के आरोपी मीठू गुर्जर और पारस को थाने बुलाकर उन्हीं से गवाहों के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाई और तत्काल प्रकरण 233/2024 दर्ज कर गवाहों को शांतिभंग में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहाँ से उन्हें जमानत मिली। 6 दिसंबर को पारस गुर्जर ने गवाह भैरू को फोन पर धमकी दी कि वह पारिवारिक मामले से दूर रहे और गवाही न दे, नहीं तो उसे फंसा दिया जाएगा। इस बातचीत की रिकॉर्डिंग भी मौजूद होने का दावा किया गया है। ग्रामीणों और गवाहों ने मांग की है कि प्रकरण की जाँच किसी अन्य उच्चाधिकारी से कराई जाए और थानाधिकारी को पद से हटाया जाए, क्योंकि उन्होंने हत्या जैसे गंभीर मामले में आरोपी पक्ष से मिलीभगत कर गवाहों को डराने, धमकाने और झूठे मामले में फंसाने का काम किया है।
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