It is recommended that you update your browser to the latest browser to view this page.

Please update to continue or install another browser.

Update Google Chrome

सर्दी का सितम: एमजीएच में बढ़े जुकाम व खांसी के रोगी
By Lokjeewan Daily - 05-01-2026

-  ठंड और शीतलहर बनी बीमारी का कारण
- अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन के मामले बढ़े
भीलवाड़ा। राजस्थान में सर्दी के तेवर तीखे होते ही जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। भीलवाड़ा के सबसे बड़े महात्मा गांधी  अस्पताल में इन दिनों सर्दी के सितम का साफ असर देखा जा रहा है। हाड़ कंपाने वाली ठंड और शीतलहर ने लोगों को मौसमी बीमारियों की चपेट में ले लिया है। आलम यह है कि अस्पताल की मेडिकल ओपीडी में उछाल आया है, जहां हर दूसरा व्यक्ति खांसी, जुकाम और बुखार से पीड़ित नजर आ रहा है। चिकित्सालय के गलियारों में बढ़ी यह भीड़ बदलते मौसम की मार का जीवंत प्रमाण है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान में अचानक आई गिरावट के कारण अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन के मामले तेजी से बढ़े हैं। मेडिकल ओपीडी में आने वाले 70 से 80 प्रतिशत मरीज सर्दी, जुकाम, बदन दर्द और वायरल फीवर की शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों में निमोनिया के लक्षण भी देखे जा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जहां मेडिकल ओपीडी में पैर रखने की जगह नहीं है, वहीं अन्य विभागों जैसे चर्म रोग, ईएनटी या सामान्य सर्जरी की ओपीडी में मरीजों की संख्या सामान्य से कम हुई है। इसका मुख्य कारण भीषण ठंड है, लोग अति-आवश्यक न होने पर घर से बाहर निकलने और अस्पताल आने से बच रहे हैं। केवल वही मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं जिन्हें तत्काल इलाज की जरूरत है।  डॉक्टरों ने सलाह दी है कि लोग सुबह और शाम के समय ठंडी हवाओं से बचें और गरम पेय पदार्थों का सेवन करें। महात्मा गांधी अस्पताल की वर्तमान स्थिति यह स्पष्ट करती है कि ठंड का प्रकोप अब केवल मौसम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। मेडिकल ओपीडी में बढ़ता दबाव स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त भार डाल रहा है। ऐसे में बचाव ही उपचार है का मंत्र सबसे कारगर है। यदि लोग सावधानी बरतें और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें, तो इस मौसमी चक्र से सुरक्षित बचा जा सकता है। प्रशासन और जनता, दोनों के सहयोग से ही इस सर्दी के सितम का मुकाबला किया जा सकता है।  

अन्य सम्बंधित खबरे