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- स्कैनिंग प्रक्रिया में शामिल करने की मांग"
- सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन, सेवा सुरक्षा का मांगा हक
भीलवाड़ा। राजस्थान की जीवनरेखा मानी जाने वाली 108 और 104 एंबुलेंस सेवाओं के हजारों कर्मचारियों ने अब अपने हक के लिए आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। पिछले 15 से 17 वर्षों से प्रदेश में आपातकालीन सेवाएं दे रहे इन कर्मचारियों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर गंभीर भेदभाव के आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वर्ष 2022 में माननीय जोधपुर हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया था। दिसंबर 2025 में इसकी कॉपी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को सौंपने के बावजूद, आज तक उन्हें राजस्थान कॉन्ट्रैक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट रूल्स, 2022 2022 के दायरे में नहीं लाया गया। ज्ञापन में बताया गया कि राज्य सरकार वर्तमान में 5 से 10 वर्ष का अनुभव रखने वाले संविदा और प्लेसमेंट एजेंसी के कर्मचारियों की स्कैनिंग (सत्यापन) करवा रही है। लेकिन 17 साल से सेवा दे रहे एंबुलेंस कर्मियों का नाम इस सूची से नदारद है। कर्मचारियों ने इसे सरकार का दोहरा मापदंड बताया है।
वित्त विभाग में अटकी है फाइल
कर्मचारी प्रतिनिधियों ने बताया कि उनकी फाइल वर्तमान में वित्त मंत्री श्रीमती दीया कुमारी के विभाग में लंबित है। बार-बार प्रतिनिधिमंडल के मिलने के बावजूद कोई ठोस परिणाम नहीं निकलने से प्रदेश भर के एंबुलेंस कर्मियों में भारी आक्रोश है। उनकी प्रमुख मांगें एनएचएमस्तर से नाम जारी कर स्पष्ट आदेश दिए जाएं। वर्तमान स्कैनिंग प्रक्रिया में तुरंत शामिल किया जाए। हाईकोर्ट के आदेश की अक्षरश: पालना सुनिश्चित हो। कोरोना काल में अपनी जान जोखिम में डालकर हजारों लोगों को अस्पताल पहुंचाने वाले इन वॉरियर्स ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी सेवा सुरक्षा पर निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
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2026-01-02 15:12:47